
उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सबसे पहले खबरें जानने के लिए हमारे न्यूज़ चैनल. News Portal uk को सब्सक्राइब करें .ख़बरों और विज्ञापन के लिए संपर्क करें – 9634912113,- 8057536955 न्यूज़ पोर्टल, उत्तराखंड के यूट्यूब चैनल में सभी विधान सभा स्तर पर संवाददाता\विज्ञापन संवाददाता, ब्यूरो चीफ की आवश्यकता है


रिपोटर-दीपक नौटियाल

स्थान-उत्तरकाशी

जनपद उत्तरकाशी मां गंगा एवं यमुना का उद्गम स्थल जहां हर पत्थर मे देवताओं का वास है हम बात कर रहे है सिल्क्यारा क्षेत्र के राडी टांप पर बसने बाले बोखनाग देवता की . मान्यता है कि इनकी इजाज़त के बगैर यहां कोई एक पत्ता भी नहीं हिला सकता


एक किंवदंति है कि सालों पहले विशल देश के राजा विश्व राणा की बारत जनपद उत्तरकाशी के धनारी क्षेत्र मे जा रही थी. राडी नामक स्थान जोकि सिल्क्यारा टनल के विल्कुल ऊपर पड़ता है वहा पर बोखनाग देवता ने उनकी बारात को रोक कर उनसे भेंट चढाने को कहा . विश्वा राणा ने बारत वापसी के समय भेंट देने का वादा किया और कहा कि बारात वापसी के समय भेंट देंगे लेकिन वापसी में भेंट चढाए बिना राजा दूसरे रास्ते से बारात ले जाने लगे जिसपर बोखनाग देवता क्रोधित हो गये ओर उसकी पूरी बारात हर ली. कहा जाता है कि इसके बाद उनके सैकड़ों बाराती और घोड़े खच्चर मर गये. तब से विश्व राणा भगवान बोखनाग के दूत के तौर पर यहा देवता बन गए. उन्होंने बोखनाग के आदेश पर गलत काम करने वालों को दण्डित करने का जिम्मा ले लिया, तभी से यहां की परंपरा बनी की हर कार्य करने से पहले भगवान बोखनाग की आज्ञा लेनी जरूरी है नहीं तो बडा नुकसान होना निश्चित है

. दूसरी ओर त्रेतायुग मे जब भागवान श्री कृष्ण केदार खंड मे आये थे तो सेम मुखेम मे सेम नागराजा एवं राडी क्षेत्र मे बासुकी नागराजा के रूप मे विराजमान हुए. तीन साल मे एक बार सेम मुखेम ओर अगले साल यहां भव्य मेले का आयोजन किया जाता है. आपसोच रहे होंगे कि बोखनाग के साथ भगवान कृष्ण का जिक्र क्यों हो रहा है . आपको बता दे की इस क्षेत्र मे बासुकीनाग देवता के रूप मे भगवान श्रीकृष्ण एवं बोखनाग के रूप मे बलराम कि पूजा होती है . बात हो रही है सिल्क्यारा की तो आपको बता दें कि सिल्क्यारा टनल जिसमे 17दिनो तक 41 मजदूर फंसे रहे और सारा विज्ञान फेल सा हो गया था.

रेस्क्यु आपरेशन अन्तिम छणो मे फेल हो रहा था फिर कम्पनी से जुडे अधिकारी बोखनाग की शरण मे गये ओर परिणाम आज सामने है स्थानीय लोगों का कहना है कि टनल की सुरूवात से पहले यहां एक छोटा सा मन्दिर स्थापित किया गया था . पुजारी भी न्यूत किया गया पर धीरे धीरे कम्पनी के अधिकारी भगवान को भूल गये ओर 11 नवम्बर को टनल से मन्दिर हटा दिया. उसी सुबह टनल ढह गयी ओर 41 मजदूर टनल मे फंस गये . आनन फानन मे रेस्क्यु टीम भी पहुंच गयी . दुनिया के सबसे बडे एक्सपर्ट भी लगे रहे पर आखिर मोके पर सब फेल हो गये . फिर कम्पनी के लोग बोखनाग देवता की शरण मे गये. अभी भी यही माना जा रहा है कि सारी सफलता बोखनाग देवता ने ही दीं. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी यहा एक विशाल मन्दिर के निर्माण की बात की है



