प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के शुरू होने के लिए अब बस कुछ ही दिन शेष

प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के शुरू होने के लिए अब बस कुछ ही दिन शेष

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रिपोटर -सचिन कुमार

स्थान -देहरादून

उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के शुरू होने के लिए अब बस कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। लेकिन सरकार के सामने चारधाम यात्रा को लेकर चुनौतियां कम होने का नाम नहीं ले रही है। दअरसल एक और जहां कोरोना के बढ़ते मामलें सरकार की टेंशन को बढ़ा रहे हैं तो दूसरी तरफ चारधाम यात्रा में व्यापारी सरकार के धामों में सीमित संख्या के फैसले का विरोध कर रहे हैं…व्यापारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपने इस फैसले को वापस नहीं लिया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा….वही विपक्ष ने भी राज्य सरकार से यात्रा में सीमित संख्या के फैसले को वापस लेने की मांग की है। इसलिए आज हम कह रहे हैं चुनौतियों का पहाड़, कैसे होगी यात्रा इसबार।उत्तराखंड की चारधाम यात्रा के कपाट 22 अप्रैल से शुरू होने जा रहे है। श्रद्धालुओं के लिए 22 अप्रैल को गंगोत्री धाम के कपाट खोल दिए जाएंगे। धामी सरकार चारधाम यात्रा को सफल बनाने की तैयारियों में जुटी हुई है। तो वहीं दूसरी तरफ चारधाम यात्रा में यात्रियों की संख्या सीमित करने का विरोध किया जा रहा है। तीर्थ पुरोहित, होटल और ढाबा कारोबारी सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। बद्रीनाथ के होटल कारोबारियों ने सरकार द्वारा धामो में सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को भेजे जाने के निर्णय का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री धामी को ज्ञापन भेजा है। होटल व्यवसाइयो का कहना है कि सरकार ने बद्रीनाथ धाम में जहां 40हजार से अधिक श्रद्धालुओ के ठहरने की ब्यवस्ता है वहां इस संख्या को सीमित करते हुए 18 हजार कर दिया, ऐसे ही केदारनाथ में 15 हजार, गंगोत्री में 9 हजार जबकि यमुनोत्री में 6 हजार श्रद्धालुओं की संख्या को सीमित कर दिया है जिससे चारधाम यात्रा से जुड़े व्यापारियों को काफी नुकसान होगा.एक तरफ जहां व्यापारी सरकार के सीमित संख्या के फैसले का विरोध कर रहे हैं

तो दूसरी तरफ देश के साथ ही उत्तराखंड राज्य में कोरोना के बढ़ते मामलों ने सरकार की चिंता को बढ़ा दिया है। दअरसल पिछले वर्ष 47 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने चारधाम यात्रा के दर्शन किए थे और सरकार को उम्मीद है कि इस वर्ष पहले से ज्यादा श्रद्धालु चारधाम यात्रा में आएंगे ऐसे में कोरोना की रोकथाम कैसे होगी इसने सरकार की टेंशन को बढ़ा रखा है.वहीं मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि सरकार के सामने चुनौतियां काफी है लेकिन उन्हें पूरी उम्मीद है कि यात्रा ऐतिहासिक होगी और सभी को यात्रा के नियमों का पालन करना होगा वहीं विपक्ष का कहना है कि सरकार ने चारधाम यात्रा के लिए कोई तैयारी नहीं की है। सरकार सिर्फ हवा हवाई बातें कर रही है साथ ही विपक्ष ने धामी सरकार से यात्रा में सीमित संख्या के फैसले को वापस लेने की मांग की ह कुल मिलाकर एक तरफ जहां संख्या सीमित होने से होटल-ढाबा कारोबारी परेशान है.उनका कहना है कि ऋण लेकर कारोबार करने वालों को काफी नुकसान होगा

साथ ही कश्मीर में पर्यटन खुल जाने से यात्रियों की संख्या इस साल कम हो सकती है। तो दूसरी तरफ सरकार का तर्क है कि संख्या सीमित न होने से चारों धामों में जुटने वाली भीड़ से दुर्घटना का खतरा हो सकता है.भौगोलिक कठिनाइयों और सीमित सुविधाओं के चलते व्यवस्था प्रभावित होगी.सीमित संख्या का भीड़ प्रबंधन करना आसान होगा और यात्री मंदिरों में सुरक्षित और सहज ढंग से दर्शन कर सकेंगे। देखना होगा आगे सरकार इस विरोध के बाद क्या अपना फैसला वापस लेगी या नहीं