

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बढ़ते गन कल्चर और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को जारी किए गए शस्त्र लाइसेंसों पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से कई चर्चित बाहुबलियों और राजनीतिक हस्तियों को जारी हथियार लाइसेंस का पूरा ब्योरा तलब किया है।



यह मामला संतकबीर नगर निवासी जयशंकर द्वारा दाखिल एक याचिका के बाद सामने आया। याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रदेश में शस्त्र लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा और गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल लोगों को भी आसानी से लाइसेंस मिल रहे हैं।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पूछा कि आखिर आपराधिक छवि वाले लोगों को हथियार रखने की अनुमति कैसे दी गई। कोर्ट ने जिन प्रमुख नामों का रिकॉर्ड मांगा है उनमें बृजभूषण शरण सिंह, राजा भैया, धनंजय सिंह और बृजेश सिंह जैसे चर्चित नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को जानकारी दी गई कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 10 लाख 8 हजार 953 शस्त्र लाइसेंस धारक हैं। इनमें 6062 ऐसे लोग हैं जिनके खिलाफ दो या उससे अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

कोर्ट ने हथियारों के खुले प्रदर्शन पर भी नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने कहा कि कई जगहों पर लाइसेंसी हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन किया जाता है, जिससे समाज में भय और असुरक्षा का माहौल बनता है। अदालत ने इसे कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती माना।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केवल शस्त्र लाइसेंस ही नहीं, बल्कि इन लोगों को मिली सरकारी सुरक्षा पर भी सवाल उठाए। अदालत जानना चाहती है कि जिन व्यक्तियों पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं, उन्हें सरकारी सुरक्षा किस आधार पर दी गई है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट की इस सख्ती के बाद अब आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के हथियार लाइसेंस की समीक्षा हो सकती है। यदि नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो कई लाइसेंस रद्द भी किए जा सकते हैं।


इस मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि कोर्ट के अगले निर्देशों के बाद राज्य सरकार को शस्त्र लाइसेंस प्रणाली में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।

