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रिपोटर -नसीम अहमद

स्थान -अल्मोड़ा

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने हाल ही में निर्देश दिए थे कि जुलूस प्रदर्शन व विभाग से इतर किसी भी गतिविधि में स्कूली छात्र—छात्राओं को शामिल नहीं किया जाएगा। लेकिन अल्मोड़ा में शिक्षा विभाग के अफसरों के कारनामें देखकर ऐसा लगता है कि ये शिक्षा मंत्री के निर्देश का पालन करना सही नहीं समझते। शिक्षा विभाग के अफसर मंत्री के निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए अपनी मनमानी पर उतर आए है।दरअसल, अल्मोड़ा में आज छात्र संगठन एबीवीपी की ओर से छात्र गर्जना सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता कम स्कूली छात्र—छात्राएं अधिक संख्या में शामिल हुए। यही नहीं रैली के दौरान छात्र—छात्राएं हाथों में एवीबीपी का झंडा लेकर सड़कों में संगठन के पक्ष में नारेबाजी करते नजर आए। जिसे देख हर कोई हैरत में पड़ गया।


मंत्री के निर्देश के बाद भी बच्चों को एबीवीपी के कार्यक्रम में शामिल कराने पर अब शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे है। इस सम्मेलन में एबीवीपी के कई बड़े नेता भी शामिल हुए। स्कूली छात्र छात्राओं को सम्मेलन में बुलाने पर जब उनसे पूछा गया तो वह शिक्षा मंत्री के बयान की जानकारी नहीं होने की बात कहते हुए एबीवीपी की खूबियां गिनाने लगे।सुरेश भट्ट, पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री, एबीवीपी स्कूली बच्चों की वार्षिक परीक्षाएं सिर पर है। लेकिन शिक्षा विभाग नौनिहालों के भविष्य व उनकी परीक्षाओं को लेकर कितना सजग है इस मामले में अंदाजा लगाया जा सकता है। छात्र—छात्राओं के पठन पाठन पर ध्यान देने के बजाय शिक्षा विभाग के अफसर एबीवीपी के एक कार्यकर्ता के आगे नतमस्तक हो जाते है। एबीवीपी कार्यकर्ता के कहने पर मुख्य शिक्षा अधिकारी द्वारा जिला मुख्यालय के शासकीय व अशासकीय कुल 6 विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को एक आदेश जारी किया जाता है जिसमें उन्हें आदेशित किया जाता है कि वह अपने स्कूल के 9वीं व 12वीं कक्षा के छात्र—छात्राओं को एबीवीपी की छात्र गर्जना रैली में शिरकत कराए। यही नहीं प्रत्येक स्कूल से दो—दो शिक्षकों को भी छात्रों के साथ गर्जना रैली में शामिल होने के निर्देश दिए जाते है।

इस मामले में प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी हेमलता भट्ट ने बताया कि वह हाल में जिले में तैनात हुई है। उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि वार्षिक परीक्षाओं के बीच बच्चों को इस तरह के कार्यक्रम में भेजना ठीक नहीं है। वह मामले की जानकारी लेंगी।


