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रिपोर्टर – दीपक अधिकारी

स्थान – हल्द्वानी

हल्द्वानी में उत्तराखंड एनआईओएस डीएलएड टीईटी प्रशिक्षित शिक्षक महासंघ के बैनर तले एकजुट हुए, युवाओं ने सरकार पर हाइकोर्ट का आदेश न मानने और प्रशिक्षित युवाओं का उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है| संगठन के प्रदेश अध्यक्ष नंदन बोहरा ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत भारत सरकार ने सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में पढ़ा रहे पहली से आठवीं तक के सभी अप्रशिक्षित शिक्षकों को संसद के दोनों सदनों में बिल पास कर डीएलएड प्रशिक्षण कराने का पाठ्यक्रम मार्च 2019 तक पूरा करने का पहला और अंतिम मौका दिया था|


जिसके बाद उत्तराखंड में डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों की संख्या करीब 37 हजार थी| लेकिन दुर्भाग्य है कि उत्तराखंड में नवंबर और दिसंबर 2020 में राजकीय प्राथमिक विद्यालयों का विज्ञापन जारी होता है| जिसमें डीएलएड प्रशिक्षतों ने भी आवेदन किया था| लेकिन विद्यालयी शिक्षा सचिव ने एनआईओएस डीएलएड प्रशिक्षतों को भर्ती प्रक्रिया से वंचित कर दिया। जिसके बाद प्रशिक्षत युवाओं ने हाइकोर्ट की शरण ली| उन्होंने बताया कि दो बार हाइकोर्ट से एनआईओएस डीएलएड उपाधि धारकों को भी गतिमान शिक्षक भर्ती और काउंसलिंग में सम्मिलित होने का आदेश दिया, लेकिन सरकार ने हाइकोर्ट की भी नही सुनी| उन्होंने बताया कि कई बार शिक्षा मंत्री शिक्षा सचिव महानिदेशक शिक्षा निदेशक प्रारंभिक शिक्षा से मिलकर अपना पक्ष रख चुके हैं| लेकिन झूठे आश्वासनों के अलावा कोई कार्रवाई नहीं हु| जिस कारण प्रशिक्षित युवा बेरोजगारी का दंश झेलने को मजबूर हैं| उन्होंने कहा कि सरकार और शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारी हाइकोर्ट के आदेशों की अवमानना के साथ ही सैकड़ों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं| अगर सुध नहीं ली गई ,तो उग्र आंदोलन का बाध्य होना पड़ेगा।


