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रिपोर्टर – दीपक नोटियाल

स्थान – उत्तरकाशी

उत्तराखंड के बहादुर चीफ डिफेन्स ऑफ़ स्टाफ (CDS) का जन्म पौड़ी गढ़वाल के द्वारीखाल में हुआ | उनकी माता का नाम सुशीला देवी और पिता का नाम सूरत सिंह परमार था | सूरत सिंह के छोटे भाई ठाकुर किशन सिंह तत्कालीन उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेताओं में थे। वह संविधान सभा के सदस्य भी रहे। रावत ने देश-विदेश में सेना, सुरक्षा शांति बनाये रखने में अपनी 40 वर्ष से अधिक की शानदार सेवाएं दी । जनरल रावत की सेना में धारदार शुरुवात रही | उनके पिता भी सेना का हिस्सा थे |


अपने पिता का तजुर्बा और बहादुरी उन्हें विरासत में मिली थी | उनकी मां सुशीला देवी एमकेपी कॉलेज में अध्यापिका थी। जनरल रावत पहली बार मिजोरम में 16 दिसम्बर 1978 को 11वीं गोरखा रायफल की 5 वीं बटालियन में कमिशन पर शामिल हुए थे | उनकी कार्यकुशलता और बॉर्डर इलाकों में तजुर्बें की दक्षता को देखते हुए भारत सरकार ने जनरल रावत को 1 जनवरी 2020 को तीनों सेना का चीफ डिफेन्स ऑफ़ स्टाफ बनाया |

उत्तराखंड में जन्मे जनरल बिपिन रावत बतौर आर्मी चीफ दो बार दो रात्रि के लिए उत्तरकाशी के हर्षिल में भी रहे। सीडीएस जनरल बिपिन रावत 19 नवम्बर 2019 को थाती गांव अपने भाई से पट्टी धनारी उत्तरकाशी मिलने आये थे | फिर 18 नवम्बर 2020 को वह हर्षिल से अपने मामकोट आये थे। जहाँ अपने भाई-भाभी सहित गाँव वासियों से मिले । उन्होंने वह घर भी देखा जहाँ उन्होंने अपना बचपन अपनी माँ के साथ बिताया | उत्तराखंड के लिए यह गौरव की बात थी जिसने देश को विपिन रावत जैसा महान व्यक्ति दिया |


अपने कार्यकाल में जनरल बिपिन रावत को परम विशिष्ट सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, युद्ध सेवा पदक, सेना पदक, विशिष्ट सेवा पदक, ऐड-डि-कैंप जैसे सम्मानों से नवाजा जा चुका है |



