

स्थान : बाज़पुर
रिपोर्टर : विशेष शर्मा


सुविधाओं की कमी और अव्यवस्थाओं को लेकर लगातार चर्चा में रहने वाले बाजपुर जिला उप चिकित्सालय का निरीक्षण करने पहुंचे आम आदमी पार्टी के पदाधिकारियों ने अस्पताल की बदहाल स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि जिला उप चिकित्सालय का दर्जा मिलने के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।


अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद आम आदमी पार्टी के नेताओं ने कहा कि वर्तमान में केवल दो विशेषज्ञ चिकित्सक और पांच एमबीबीएस डॉक्टरों के सहारे अस्पताल की व्यवस्था संचालित हो रही है। स्टाफ की भारी कमी के कारण यह अस्पताल मरीजों के समुचित उपचार के बजाय रेफरल सेंटर बनकर रह गया है।



पार्टी पदाधिकारियों ने बताया कि अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ, सर्जन और अन्य महत्वपूर्ण विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद लंबे समय से खाली हैं। इसके चलते ऑपरेशन थिएटर जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं का भी समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है और मरीजों को अन्य अस्पतालों के लिए रेफर किया जा रहा है।


निरीक्षण के दौरान नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जनता के पैसे से निर्मित ऑक्सीजन प्लांट और पोस्टमार्टम हाउस जैसी सुविधाएं तक पूरी तरह संचालित नहीं हो सकी हैं। इससे सरकारी संसाधनों के उपयोग पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

आम आदमी पार्टी के विधानसभा प्रभारी राजेंद्र सिंह वेदी ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता और संसाधनों का गलत उपयोग हो रहा है, जबकि आम जनता को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।


उन्होंने कहा कि पार्टी जल्द ही स्थानीय विधायक, शासन और प्रशासन को इस संबंध में एक विस्तृत पत्र भेजेगी। यदि इसके बाद भी अस्पताल की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन और अन्य लोकतांत्रिक आंदोलन किए जाएंगे।


इस संबंध में जिला उप चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. पी. डी. गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में मौजूद समस्याओं के बारे में कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सकों और अन्य सुविधाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान शासन स्तर पर ही संभव है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब यह अस्पताल संयुक्त चिकित्सालय था, तब यहां कई महत्वपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध थीं। लेकिन जिला उप चिकित्सालय का दर्जा मिलने के बाद सुविधाएं बढ़ने के बजाय कम होती चली गईं। वर्षों से विभिन्न सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों द्वारा मांग उठाए जाने के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है, जिससे क्षेत्रवासियों में नाराजगी बनी हुई है।

