टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का आंदोलन तेज, 22 जून को सचिवालय घेराव का ऐलान

टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का आंदोलन तेज, 22 जून को सचिवालय घेराव का ऐलान

स्थान : चंपावत
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संगठन के नेतृत्व में प्रदेशभर के राजकीय प्राथमिक शिक्षक टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता के विरोध में लामबंद हो गए हैं। इसी क्रम में सोमवार को लोहाघाट स्थित शिक्षक भवन में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें 22 जून को देहरादून में प्रस्तावित सचिवालय घेराव को सफल बनाने की रणनीति पर चर्चा की गई।

बैठक की अध्यक्षता राजकीय प्राथमिक शिक्षक संगठन चंपावत के जिला अध्यक्ष उत्तम फर्त्याल ने की, जबकि संचालन शिक्षक कीर्ति भट्ट ने किया। बैठक में उपस्थित शिक्षक नेताओं और शिक्षकों ने टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता का कड़ा विरोध करते हुए अपने विचार रखे।

शिक्षक नेताओं ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1 सितंबर 2025 और 29 मई 2026 को दिए गए आदेशों में टीईटी की अनिवार्यता को बरकरार रखते हुए समीक्षा याचिकाओं को खारिज कर दिया गया है तथा टीईटी उत्तीर्ण करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2028 तक बढ़ाई गई है। उन्होंने कहा कि वे न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन यह मुद्दा लाखों शिक्षकों और उनके परिवारों से जुड़ा हुआ है।

शिक्षकों का कहना है कि टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों को भी परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जबकि उनकी नियुक्ति उस समय के वैधानिक नियमों और निर्धारित योग्यता के आधार पर हुई थी। संगठन के अनुसार इस आदेश से देशभर में 25 से 30 लाख शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक शामिल हैं जो 15 से 25 वर्षों या उससे अधिक समय से सफलतापूर्वक शिक्षण कार्य कर रहे हैं।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड में भी हजारों शिक्षक इस आदेश से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि टीईटी लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इस व्यवस्था से बाहर रखा जाए। शिक्षकों का कहना है कि 40 से 55 वर्ष आयु वर्ग के कई शिक्षकों के लिए दोबारा परीक्षा देना बेहद कठिन है और इससे उनकी नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है।

शिक्षक नेताओं ने आरोप लगाया कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो बड़ी संख्या में शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ जाएगी, जिससे कई प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी उत्पन्न होगी और बच्चों की शिक्षा प्रभावित होगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार निजी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रही है।

संगठन ने घोषणा की कि 22 जून को परेड ग्राउंड, देहरादून से सचिवालय तक आक्रोश रैली निकाली जाएगी और सचिवालय का घेराव किया जाएगा। शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे शिक्षण कार्य बहिष्कार, चुनाव बहिष्कार, एसआईआर कार्य और अन्य सरकारी योजनाओं से दूरी बनाने जैसे कदम उठा सकते हैं।

जिला अध्यक्ष उत्तम फर्त्याल ने सभी प्राथमिक शिक्षकों से आंदोलन को सफल बनाने के लिए अधिक से अधिक संख्या में देहरादून पहुंचने की अपील की। इस मुद्दे को लेकर शिक्षक समुदाय में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।