आईएमए देहरादून में 515 कैडेट्स बने सैन्य अफसर, ऐतिहासिक पल का गवाह बना परेड ग्राउंड

आईएमए देहरादून में 515 कैडेट्स बने सैन्य अफसर, ऐतिहासिक पल का गवाह बना परेड ग्राउंड

स्थान : देहरादून
ब्यूरो रिपोर्ट

देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) एक बार फिर ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण पल का साक्षी बना, जब 515 कैडेट्स ने सफल प्रशिक्षण के बाद भारतीय सेना में बतौर अधिकारी कदम रखा। पासिंग आउट परेड के दौरान जब कैडेट्स ने अंतिम पग भरते हुए अपनी प्रशिक्षण यात्रा को पूर्ण किया, तो पूरा परिसर देशभक्ति और गर्व के भाव से गूंज उठा।

इस भव्य समारोह में कैडेट्स के परिजन भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। जैसे ही युवा कैडेट्स ने वर्दी में अपना अंतिम पग आगे बढ़ाया, वहां मौजूद माता-पिता की आंखें गर्व और भावनाओं से भर आईं। कहीं खुशी के आंसू थे तो कहीं अपने बच्चों की उपलब्धि पर गर्व का भाव साफ नजर आ रहा था।

इस खास अवसर पर लेफ्टिनेंट आशीष भी भारतीय सेना का हिस्सा बने। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर प्रयास को दिया। लेफ्टिनेंट आशीष ने कहा कि सैन्य जीवन में सफलता का मूल मंत्र केवल समर्पण और अनुशासन है, जिसे उन्होंने पूरी ट्रेनिंग के दौरान अपनाया।

लेफ्टिनेंट आशीष ने बताया कि उनके पिता स्वयं भारतीय सेना की पैरा फोर्स में रह चुके हैं, और वही उनके सबसे बड़े प्रेरणास्रोत रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिता की सेवा और अनुभव ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी और कठिन समय में उनका हौसला बढ़ाया।

ट्रेनिंग के दौरान भी उनके पिता लगातार उन्हें मानसिक रूप से मजबूत रहने और लक्ष्य पर केंद्रित रहने की सीख देते रहे। इस पारिवारिक सैन्य पृष्ठभूमि ने आशीष के भीतर देशसेवा की भावना को और भी मजबूत किया।

इस ऐतिहासिक क्षण पर लेफ्टिनेंट आशीष के परिवार के अन्य सदस्य भी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि यह पल उनके परिवार के लिए गर्व और सम्मान से भरा हुआ है, क्योंकि उनका बेटा अब देश की सेवा के लिए तैयार एक अधिकारी बन चुका है।

आईएमए का यह पासिंग आउट परेड समारोह न केवल कैडेट्स के लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक बना, बल्कि उनके परिवारों और पूरे देश के लिए भी गर्व का क्षण साबित हुआ, जो भारतीय सेना की परंपरा और गौरव को और मजबूत करता है।