

स्थान : ज्योतिर्मठ
ब्यूरो रिपोर्ट

ज्योतिर्मठ स्थित पौराणिक Narsingh Temple ज्योतिर्मठ में बैसाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी के पावन अवसर पर नृसिंह प्राकट्योत्सव देव पर्व हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।


धार्मिक मान्यता के अनुसार Narasimha भगवान श्री हरि विष्णु का उग्र अवतार हैं, जिन्होंने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए अवतार लिया था। ज्योतिर्मठ का यह नृसिंह मंदिर उनकी शांति स्थली के रूप में प्रसिद्ध है, जहां हर वर्ष इस पर्व को विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।


सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। विदेशी श्रद्धालुओं सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए भक्तों ने भगवान श्री नृसिंह देवता के दर्शन किए। मंदिर को करीब 25 कुंतल पुष्पों से भव्य रूप से सजाया गया, जिसकी दिव्यता और आकर्षण ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।


इस धार्मिक आयोजन का संचालन बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती के मार्गदर्शन में किया गया। मुख्य पुजारी सुशील डिमरी ने विधि-विधान से भगवान श्री नृसिंह देव का अभिषेक और पुष्प श्रृंगार किया, जिसके बाद विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई।

कार्यक्रम के दौरान विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया गया और भगवान को विशेष भोग प्रसाद अर्पित किया गया। इसके पश्चात भव्य आरती का आयोजन हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए और पूरे मंदिर परिसर में भक्ति का माहौल छा गया।

आरती के बाद “जय श्री नृसिंह भगवान” के जयघोष से वातावरण गूंज उठा। श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और आस्था के साथ प्रसाद ग्रहण किया।


इस अवसर पर Indo-Tibetan Border Police (आईटीबीपी) द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन ने धार्मिक और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।


