
ब्यरो रिपोर्ट

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध के कारण खाड़ी देशों (Gulf Countries) के सोने और ज्वैलरी बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय निवेशकों और शादी के लिए गहने खरीदने वालों के लिए यह खबर बेहद अहम है, क्योंकि इसका असर भारत में भी दिख सकता है।


खाड़ी देशों में लगभग 2 अरब डॉलर के ज्वैलरी मार्केट में भारतीय शोरूम्स की बिक्री में मार्च महीने में 70% तक की गिरावट आई है। मालाबार गोल्ड, कल्याण ज्वैलर्स, जॉय अलुक्कास और टाटा के तनिष्क जैसे बड़े ब्रांड्स के स्टोर खाली पड़े हैं और बाजार में सन्नाटा देखा जा रहा है।

मार्च 2026 के आंकड़ों ने इंडस्ट्री को चौंका दिया। पिछले साल के मुकाबले इस साल ग्राहकों की संख्या में भारी कमी आई है। हालांकि यूएई में दुकानें खुली हैं, लेकिन युद्ध की अनिश्चितता ने लोगों की खरीदारी पर असर डाला है।


दिग्गज कंपनियों ने इस संकट पर चिंता जताई है। टाइटन (तनिष्क) ने कहा कि यूएई में स्टोर खुले हैं, लेकिन मार्च में ग्राहकों के सेंटिमेंट और सेल्स पर बुरा असर पड़ा। सऊदी अरब में ईद के दौरान बिक्री ठीक रही, लेकिन विस्तार योजनाएं फिलहाल स्थगित कर दी गई हैं।
जॉय अलुक्कास ग्रुप के चेयरमैन जॉय अलुक्कास ने बताया कि युद्ध शुरू होने के शुरुआती हफ्तों में हालात सबसे खराब थे। अब लोग गहनों के बजाय गोल्ड कॉइन और बार (Bullion) खरीदना पसंद कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि टूरिस्ट्स के न आने और एशियाई प्रवासियों द्वारा खरीदारी टालने से भारतीय ज्वैलरी कंपनियों को खाड़ी देशों में बड़ा नुकसान हुआ है। दुबई गोल्ड एंड ज्वैलरी ग्रुप के डायरेक्टर आशीष गर्ग के अनुसार, यह प्रभाव अगले कुछ महीनों तक जारी रह सकता है।

खाड़ी के ज्वैलरी बाजार में भारतीय कंपनियों की हिस्सेदारी लगभग 50% है। इसका मतलब है कि खाड़ी के संकट का असर सीधे भारतीय शोरूम्स और बिक्री पर पड़ रहा है।
स्थिति इतनी अनिश्चित है कि भारतीय ज्वैलरी दिग्गजों ने खाड़ी देशों में नए स्टोर खोलने की योजना अनिश्चितकाल के लिए रोक दी है। अब कंपनियां घाटा पूरा करने के लिए अमेरिका और सुदूर पूर्व (Far East) के बाजारों की ओर रुख कर रही हैं।

