
स्थान : रूड़की
ब्यूरो रिपोर्ट

रुड़की के लँढोरा में जमीअत उलेमा ए हिंद के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मुफ्ती रियासत अली ने दहेज प्रथा पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दहेज में बेवजह खर्च रोककर यह धन बच्चों की शिक्षा में लगाया जाना चाहिए।


मदरसा इमदादुल इस्लाम लँढौरा में जिला स्तर पर आयोजित मीटिंग में मुफ्ती रियासत अली ने बताया कि दहेज का चलन बढ़ता जा रहा है, जिससे मीडियम और गरीब वर्ग की बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। उनका कहना था कि माता-पिता अपनी बेटियों को संपत्ति में हिस्सा देने के मामलों में कोई हर्ज नहीं है और यह दीनी दृष्टि से भी सही है।


मीटिंग में मास्टर अहसान अली ने कहा कि बारात में कम से कम लोगों को ले जाया जाए और दावत नामा केवल वालीमे तक ही सीमित किया जाए। इससे अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाई जा सकेगी।


विधायक फुरकान अहमद ने कहा कि दहेज जैसी कुप्रथा को रोकने के लिए समाज के सभी मौजिज लोगों को आगे आना चाहिए। वहीं, नगर पंचायत अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद नसीम ने बैंड-बाजा, डीजे, सगाई रस्म आदि के फिजूल खर्च पर रोक लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मौलाना नवाब अली ने कहा कि ब्याह और शादी में कई खर्चीली रस्में हैं, जिन पर रोक लगना बेहद जरूरी है। वहीं, एडवोकेट अब्दुल शमी ने कहा कि हर बिरादरी के मौजिज लोगों को आगे आकर इस पहल में योगदान देना होगा।

मीटिंग में यह तय किया गया कि दहेज प्रथा रोकने के लिए हर गांव में कमेटी का गठन किया जाएगा। इन कमेटियों का काम होगा कि समाज में जागरूकता फैलाई जाए और अनावश्यक खर्च और कुप्रथा को पूरी तरह समाप्त किया जाए।


