
स्थान : लालकुआँ
रिपोर्टर : मुन्ना अंसारी

गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में किसानों के हित में एक दिवसीय क्षेत्रीय वृहत प्राकृतिक खेती परामर्श सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ कुलपति प्रोफेसर डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस कार्यशाला में बड़ी संख्या में किसान, कृषि विशेषज्ञ और शोधकर्ता शामिल हुए।


कार्यक्रम के दौरान जैविक खेती और प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों और प्राकृतिक विकल्पों के लाभों के बारे में जानकारी दी। साथ ही टिकाऊ खेती की दिशा में कदम बढ़ाने पर जोर दिया गया।


कार्यशाला में विभिन्न कृषि पुस्तिकाओं का भी विमोचन किया गया। इन पुस्तिकाओं में आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ पारंपरिक और प्राकृतिक खेती के तरीकों को सरल भाषा में समझाया गया है, जिससे किसानों को व्यवहारिक ज्ञान मिल सके।


इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों के उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों ने भाग लिया। इन किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और प्राकृतिक खेती अपनाने के फायदे बताए।
किसानों और विशेषज्ञों के बीच संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें खेती से जुड़े कई मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। किसानों ने अपनी समस्याएं रखीं, जिनका समाधान विशेषज्ञों द्वारा सुझावों के माध्यम से किया गया।

इस अवसर पर कुलपति प्रोफेसर डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने कहा कि जागरूक किसानों के साथ इस तरह की कार्यशालाएं बेहद जरूरी हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे धीरे-धीरे रासायनिक खेती को कम करते हुए प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें।

उन्होंने यह भी कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखती है, बल्कि किसानों की लागत भी कम करती है और पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाती है। विश्वविद्यालय भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को जागरूक करता रहेगा।

