
स्थान : खटीमा ऊधम सिंह नगर
रिपोर्ट : अशोक सरकार

उत्तराखण्ड से जहाँ प्रदेश के विकास की रीढ़ माने जाने वाले डिप्लोमा इंजीनियर्स ने अपनी 27 सूत्रीय मांगों के समाधान के लिए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ‘उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ’ के आह्वान पर 23 मार्च 2026 से पूरे प्रदेश में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो गई है।


प्रदेशभर के विभिन्न इंजीनियरिंग विभागों में PWD, सिंचाई, लघु सिंचाई और पेयजल निगम के हजारों जूनियर इंजीनियर और सहायक अभियंता अपनी ड्यूटी से दूर हैं। देहरादून से लेकर अल्मोड़ा, नैनीताल और बागेश्वर तक विभागाध्यक्ष कार्यालयों और जिला मुख्यालयों में विरोध प्रदर्शन जारी है। हड़ताल के कारण कई विकास परियोजनाओं और निर्माण कार्यों पर असर पड़ा है।


महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष आर.सी. शर्मा और महासचिव वीरेंद्र गुसाईं ने कहा कि सरकार उनकी जायज मांगों की उपेक्षा कर रही है। कई दौर की वार्ता विफल होने के बाद अभियंताओं को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल अपनी अधिकारों और सुविधाओं के लिए संघर्ष करना नहीं, बल्कि जनहित में बेहतर सेवाएं सुनिश्चित करना भी है।

महासंघ की प्रमुख मांगों में लंबित वेतन विसंगतियों का समाधान, 2013 के बाद नियुक्त अभियंताओं को 10 साल की सेवा के बाद ₹5,400 ग्रेड पे का लाभ, पदोन्नति में न्यूनतम तीन पदोन्नतियों का प्रावधान और पुरानी पेंशन FR योजना की बहाली शामिल है। साथ ही, उत्तराखण्ड पेयजल निगम और जल संस्थान का एकीकरण व राजकीयकरण भी उनकी मांगों में शामिल है।
अभियंताओं ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। महासंघ के पदाधिकारियों का आरोप है कि 24 फरवरी को मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान आश्वासन मिलने के बावजूद शासन स्तर पर कोई ठोस आदेश जारी नहीं किया गया। उनका कहना है कि सरकार की वादाखिलाफी ने उन्हें मजबूर कर दिया है।

वर्तमान में आवश्यक सेवाओं को हड़ताल से बाहर रखा गया है, लेकिन महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि 31 मार्च तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 1 अप्रैल से बिजली, पानी और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं से जुड़े अभियंता भी काम बंद कर देंगे। इससे प्रदेश में स्थिति और विकट हो सकती है। अब यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार इस गतिरोध को खत्म करने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।


