उत्तरकाशी का शक्ति मंदिर: रहस्यमयी त्रिशूल बना आस्था का केंद्र

उत्तरकाशी का शक्ति मंदिर: रहस्यमयी त्रिशूल बना आस्था का केंद्र

स्थान : उत्तरकाशी
ब्यरो रिपोर्ट

उत्तरकाशी का शक्ति मंदिर एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जो श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर के पास स्थित है।

मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित विशाल त्रिशूल है, जिसकी ऊंचाई लगभग 6 मीटर और परिधि करीब 90 सेंटीमीटर बताई जाती है। यह त्रिशूल किस धातु का बना है, इसका अब तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है।

इस त्रिशूल को लेकर एक अद्भुत रहस्य यह भी है कि इसे हाथ से जोर लगाने पर नहीं, बल्कि केवल अंगुली से हल्का स्पर्श करने पर हिलता हुआ महसूस किया जा सकता है, जो श्रद्धालुओं के लिए आश्चर्य का विषय बना हुआ है।

मंदिर के पुरोहित आचार्य आशीष भट्ट के अनुसार, यह मंदिर प्राचीन काल से ही लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है और यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवासुर संग्राम के दौरान देवताओं ने इस त्रिशूल को प्रकट किया था। माना जाता है कि इसी त्रिशूल से मां शक्ति ने असुरों का वध किया था। इसका उल्लेख स्कन्द पुराण के केदार खंड में भी मिलता है।

त्रिशूल की गहराई को लेकर भी रहस्य बना हुआ है। अब तक कोई भी इसकी वास्तविक गहराई का पता नहीं लगा सका है।

इतिहास के अनुसार, गोरखा काल में इस त्रिशूल को पशुपतिनाथ मंदिर ले जाने के उद्देश्य से खुदाई की गई थी, लेकिन कुछ ही फीट खुदाई के बाद सांप निकलने लगे, जिसके कारण यह कार्य रोक दिया गया।

मान्यता है कि इस त्रिशूल का एक सिरा धरती पर है, जबकि दूसरा पाताल लोक में शेष नाग के सिर पर स्थित है। मंदिर के समीप भगवान काशी-विश्वनाथ स्वयंभू रूप में विराजमान हैं, जिससे यहां शिव और शक्ति दोनों के दर्शन एक साथ होते हैं। नवरात्र और दशहरा के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है।