102 साल बाद होली पर चंद्र ग्रहण, 27 मिनट का पर्वकाल

102 साल बाद होली पर चंद्र ग्रहण, 27 मिनट का पर्वकाल

ब्यूरो रिपोर्ट

खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से वर्ष 2026 की शुरुआत एक बड़ी घटना के साथ हो रही है। इस साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को होली के दिन फाल्गुन पूर्णिमा पर लगने जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पूरे 102 वर्षों के बाद फाल्गुन पूर्णिमा पर ऐसा संयोग बन रहा है, जिसे विशेष माना जा रहा है।

आचार्य पं. अंशुमान मिश्र के मुताबिक इस चंद्र ग्रहण का पर्वकाल मात्र 27 मिनट का रहेगा, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में इसका प्रभाव व्यापक बताया गया है। ग्रहण का सूतक काल 3 मार्च को सुबह 9:20 बजे से प्रारंभ हो जाएगा और ग्रहण समाप्ति तक प्रभावी रहेगा। सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद रखे जाएंगे और धार्मिक अनुष्ठान स्थगित रहेंगे।

मानसिक प्रभाव और सामाजिक आशंकाएं

ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। ऐसी स्थिति में ग्रहण के दौरान मानसिक तनाव, भ्रम, चिड़चिड़ापन और स्मरण शक्ति में कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ग्रहण विशेष रूप से मातृ स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।

यह ग्रहण पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में घटित होगा। ज्योतिषीय आकलन के अनुसार कला, संगीत, साहित्य और शिल्प से जुड़े लोगों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण रह सकता है। संत समाज और आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़े लोगों पर भी इसका विशेष प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।

चूंकि ग्रहण मंगलवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए अग्निभय, चोरी की घटनाओं और राजनीतिक उपद्रव जैसी स्थितियों की संभावना भी व्यक्त की जा रही है। हालांकि प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए सतर्क रहने की तैयारी में हैं।

राशियों पर ग्रहण का प्रभाव

इस चंद्र ग्रहण का असर सभी 12 राशियों पर अलग-अलग रूप में दिखाई देगा।

  • वृष, मिथुन और तुला राशि के जातकों के लिए यह ग्रहण कार्य सिद्धि और धन लाभ के संकेत दे रहा है।
  • वहीं मेष, कर्क, सिंह, कन्या, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि के लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, आर्थिक हानि और मानसिक संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है।

ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि ग्रहण काल में संयम और सावधानी बरतना आवश्यक है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और बीमार व्यक्तियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

अशुभ प्रभाव से बचाव के उपाय

अनिष्ट प्रभावों को कम करने के लिए यथाशक्ति जप-पाठ और पूजा-अर्चना करने की सलाह दी गई है। ग्रहण काल में ‘श्रीमहामृत्युंजय मंत्र’ का जप विशेष रूप से फलदायी माना गया है।

ग्रहण समाप्ति के बाद ‘छायापात्र दान’ करने की भी परंपरा है। इसके तहत कांस्य की कटोरी में घी भरकर उसमें अपना चेहरा देखकर दान किया जाता है। मान्यता है कि इससे क्लिष्ट रोगों और नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के बाद स्नान-दान और पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टिकोण

वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जो पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य की विशेष स्थिति के कारण घटित होती है। वहीं धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में इसे विशेष महत्व दिया जाता है।

ऐसे में होली के दिन लगने वाला यह चंद्र ग्रहण आस्था और खगोल विज्ञान, दोनों दृष्टियों से चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासनिक स्तर पर भी मंदिरों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर विशेष व्यवस्थाएं किए जाने की संभावना है।

होली के उल्लास के बीच लगने वाला यह चंद्र ग्रहण श्रद्धालुओं और आमजन के लिए जिज्ञासा और सावधानी दोनों का संदेश लेकर आ रहा है।