
स्थान : देहरादून

ब्यूरो रिपोर्ट

बीती 21 फरवरी को प्रदेश के शिक्षा निदेशक पर भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ के कथित समर्थकों द्वारा जानलेवा हमला किया गया था। इस घटना के बाद विधायक और उनके समर्थक लगातार विवादों में घिर गए।


घटना के बाद विधायक ने प्रेस वार्ता कर माफी मांगी। उन्होंने बताया कि FIR वापस लेने का मामला दोनों पक्षों के आपसी सहमति से सुलझा लिया गया। उनके अनुसार FIR को वापस लेने की प्रक्रिया दोनों पक्षों की सहमति से हुई, न कि किसी दबाव में।


हालांकि, कांग्रेस ने इस बयान को सिरे से खारिज किया। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता प्रतिमा सिंह ने आरोप लगाया कि विधायक अपने पद का इस्तेमाल कर शिक्षा निदेशक पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
प्रतिमा सिंह ने कहा कि जिस शिक्षा निदेशक के सिर पर गंभीर चोट लगी थी, उस पर FIR वापस लेने के लिए दबाव बनाना पूरी तरह नाजायज और असंवैधानिक है। उन्होंने इस मामले को सत्ता का दुरुपयोग बताया।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद विधानसभा और आगामी चुनावी माहौल में भाजपा और कांग्रेस के बीच संघर्ष को और बढ़ा सकता है। विपक्ष इसे सत्ता दुरुपयोग के रूप में दिखा कर भाजपा पर निशाना साध सकता है।


विधायक उमेश शर्मा काऊ ने मामले को आपसी सहमति से सुलझा लेने का दावा किया है, लेकिन कांग्रेस के आरोपों से मामला और राजनीतिक गरमागरमी में बदल गया है।

इस मामले में प्रशासन ने अभी तक कोई अंतिम टिप्पणी नहीं दी है, लेकिन यह विवाद स्थानीय राजनीति में लंबे समय तक चर्चा में रह सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि FIR और माफी का मुद्दा न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील है।

कुल मिलाकर, शिक्षा निदेशक पर हमला और FIR वापस लेने का विवाद भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए बड़े राजनीतिक दांव का विषय बन गया है।


