होलिका दहन 2026: भद्रा के प्रभाव से सावधान रहकर करें पूजा

होलिका दहन 2026: भद्रा के प्रभाव से सावधान रहकर करें पूजा

ब्यूरो रिपोर्ट

इस साल होलिका दहन 3 मार्च को हो रहा है, लेकिन ज्योतिषियों ने पूजा के समय भद्रा के समाप्त होने तक प्रतीक्षा करने की सलाह दी है। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले मुहूर्त और भद्रा का विचार करना अनिवार्य माना गया है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भद्रा काल विघ्नकारी होता है और इस समय किए गए मांगलिक कार्यों में सफलता की संभावना कम होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि होलिका दहन के दौरान भद्रा काल में अग्नि जलाना अशुभ माना गया है और इससे न केवल पूजा का फल कम होता है, बल्कि समाज और व्यक्ति के लिए कष्टकारी भी हो सकता है।

भद्रा का पौराणिक महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भद्रा सूर्य देव की पुत्री और शनि देव की बहन हैं। जन्म के समय ही उनका स्वभाव उग्र और विनाशकारी था, जिससे यज्ञ-अनुष्ठानों में बाधा उत्पन्न होती थी। इसके बाद ब्रह्मा जी ने भद्रा को पंचांग के विशेष समय ‘विष्टि करण’ में स्थान दिया और कहा कि इस समय किसी भी मांगलिक कार्य को नहीं करना चाहिए। तब से भद्रा के समय शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है।

होलिका दहन और भद्रा

शास्त्रों में स्पष्ट निर्देश है कि भद्रा काल में होलिका दहन नहीं करना चाहिए। कहा गया है – “भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा” – अर्थात, भद्रा काल में श्रावणी और फाल्गुनी महीने के कोई भी मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि भद्रा में अग्नि जलाने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है और जन-धन की हानि भी संभव है।

ग्रहों का प्रभाव

ज्योतिषीय दृष्टि से भद्रा काल में मानसिक एकाग्रता कम हो सकती है। इस वर्ष 3 मार्च को भद्रा के साथ-साथ चंद्र ग्रहण भी है, जो समय को और अधिक संवेदनशील बनाता है। इस समय किए गए पूजा-अर्चना में सावधानी और सही मुहूर्त का पालन अत्यंत आवश्यक है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि होलिका पूजन शांत मन से करें, मंत्रों का जाप करें और अग्नि देव से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। सही समय पर किया गया पूजन ही जीवन के सभी कष्टों को भस्म करने की शक्ति रखता है।