
स्थान : सिद्ध पीठ मां नंदा देवी राजराजेश्वरी मंदिर देवराडा
ब्यूरो रिपोर्ट

उत्तराखंड की आस्था और परंपरा से जुड़ी मां नंदा देवी राजजात यात्रा, जिसे उत्तराखंड का हिमालय कुंभ कहा जाता है, एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। 288 किलोमीटर लंबी यह पैदल यात्रा विश्व की सबसे लंबी धार्मिक यात्राओं में मानी जाती है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं।


यह ऐतिहासिक यात्रा आमतौर पर 12 वर्षों में एक बार आयोजित की जाती है, लेकिन इस बार इसके आयोजन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। वर्ष 2026 या 2027 में यात्रा आयोजित होगी या नहीं, इस पर अब तक अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका है।

यात्रा के आयोजन में हो रही देरी का प्रमुख कारण नंदा देवी राजजात समिति और नंदा देवी कुरूण मंदिर समिति के बीच तालमेल का अभाव बताया जा रहा है। दोनों समितियों के बीच समन्वय न बन पाने के कारण आयोजन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।


इसी विषय को लेकर हाल ही में एक महापंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें यात्रा के भविष्य को लेकर गहन चर्चा हुई। महापंचायत में तीर्थ पुरोहितों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया और अपनी-अपनी राय रखी।

महापंचायत में यह बात उभरकर सामने आई कि नंदा देवी राजजात केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक है। वक्ताओं ने राजनीतिक हस्तक्षेप से ऊपर उठकर परंपरा के अनुसार यात्रा आयोजित करने पर जोर दिया।


बैठक में दोनों समितियों के बीच आपसी संवाद और समन्वय बढ़ाने के लिए प्रयास तेज करने पर सहमति बनी, ताकि जल्द से जल्द यात्रा की तिथि को लेकर स्पष्ट निर्णय लिया जा सके। साथ ही शासन-प्रशासन से भी हस्तक्षेप कर समाधान निकालने की मांग की गई।
फिलहाल, नंदा देवी राजजात के आयोजन को लेकर असमंजस बरकरार है।
महापंचायत के बाद क्या निर्णय सामने आएंगे और यह ऐतिहासिक यात्रा 2026 में होगी या 2027 में, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। हम आपको इस पूरे घटनाक्रम की सीधी तस्वीरें जीरो ग्राउंड से हमारे संवाददाता विनोद पांडे के माध्यम से लगातार दिखाते रहेंगे।

