पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बजट–2026-27 को बताया “माथे का चंदन”, भाजपा पर साधा निशाना

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बजट–2026-27 को बताया “माथे का चंदन”, भाजपा पर साधा निशाना

स्थान : ऋषिकेश
ब्यूरो रिपोर्ट

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बजट–2026-27 पर तीखा बयान देते हुए कहा कि ऐसी नीतियां बनाई जानी चाहिए जो उत्तराखंड के मस्तक पर टिक सकें, न कि ऐसी जो प्रदेश के लोगों के लिए परेशानी का कारण बनें। उन्होंने बजट में रेल और हवाई कनेक्टिविटी की कमी पर भाजपा सरकार को घेरा।

रावत ने कहा कि ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेलवे लाइन को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा कांग्रेस सरकार के समय मिला था, लेकिन उसके बाद कोई नई राष्ट्रीय रेलवे परियोजना धरातल पर नहीं उतरी।

टनकपुर–बागेश्वर रेलवे लाइन पर भी काम शुरू नहीं हो पाया। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य के अधिकांश एयरपोर्ट, हेलीपैड और हेलीपोर्ट पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में बने, लेकिन वर्तमान सरकार एक भी नया प्रोजेक्ट गिनाने की स्थिति में नहीं है।

शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति पर बोलते हुए हरीश रावत ने कहा कि दोनों क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से महंगे हो चुके हैं। मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लिए अच्छी शिक्षा और गंभीर बीमारी का इलाज कराना बेहद कठिन हो गया है।

वित्तीय स्थिति पर चर्चा करते हुए रावत ने कहा कि पहले वित्त आयोग के तहत घाटे की प्रतिपूर्ति के लिए विशेष सहायता मिलती थी, जिससे राज्य को हजारों करोड़ रुपये का लाभ होता था। लेकिन अब नई व्यवस्था में पर्वतीय और पिछड़े राज्यों को अपेक्षित सहायता नहीं मिल रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि पहले केंद्रीय करों में राज्यों के हिस्से के बंटवारे में वनाच्छादित और भौगोलिक रूप से कठिन राज्यों को प्राथमिकता दी जाती थी, लेकिन नई नीति के तहत अधिक जीडीपी वाले विकसित राज्यों को ज्यादा हिस्सा दिया जाएगा। इस बदलाव से गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल और पंजाब जैसे राज्यों को लाभ होगा, जबकि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्य नुकसान में रहेंगे।

हरीश रावत ने बजट को लेकर साफ तौर पर कहा कि उत्तराखंड की वास्तविक जरूरतों और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही नीतियां बनाई जानी चाहिए।