
स्थान – लोहाघाट
ब्यूरो रिपोर्ट
धामी सरकार द्वारा जिलों के पुराने नौलों, धाराओं और जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन की योजना चलाई गई है। हालांकि, चंपावत जिले में इस योजना के प्रति अधिकारियों की उदासीनता का उदाहरण सामने आया है। लोहाघाट के तल्ला चांदमारी स्थित सीडर वैली क्षेत्र का प्राचीन नौला लंबे समय से गंदे और बदबूदार पानी से भरा हुआ है।


क्षेत्रवासियों ने बताया कि यह नौला कभी साफ और स्वच्छ जल से भरा रहता था और दूर-दूर से लोग पानी भरने आते थे। हालाँकि, आज नौले में गंदे नालों का पानी रिसने के कारण जल पूरी तरह दूषित हो चुका है। लोगों ने कई बार सफाई के प्रयास किए, लेकिन नालों की समस्या के कारण जल की शुद्धता कायम नहीं रह सकी।


वासी बताते हैं कि इस मामले में उन्होंने लोहाघाट विधायक और विभागीय अधिकारियों से भी मदद मांगी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस बार जिलाधिकारी के जनता मिलन कार्यक्रम में भी समस्या रखी गई थी, जिसमें जिलाधिकारी ने कृषि विभाग और ब्लॉक कार्यालय लोहाघाट के अधिकारियों को समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए थे।


क्षेत्रवासियों का कहना है कि अधिकारियों ने बजट की कमी का हवाला देते हुए समस्या का समाधान नहीं किया। “हर घर जल, हर घर नल” योजना का लाभ भी इस क्षेत्र तक नहीं पहुंचा, और लोग पेयजल के लिए नर्सरी और अक्कलधारे तक कई किलोमीटर दूर जाकर पानी ढोते हैं। कई लोगों ने लाखों रुपए खर्च कर कुएं खुदवाए हैं।

जनता ने जिलाधिकारी से मांग की है कि नौले के आसपास बह रहे नालों का पुनर्निर्माण कर पटाल से ढकने और नौले का जीर्णोद्धार किया जाए। साथ ही बरसात के समय नालियों के बंद होने से होने वाली दुर्घटनाओं से बचाव के लिए सुरक्षा उपाय किए जाएँ। क्षेत्रवासियों ने नौले के पास सोलर लाइट लगाने और सोलर हैंडपंप खोदने की भी मांग की।

क्षेत्रवासी नाराज हैं और सरकार की योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन न होने को गंभीर चिंता का विषय मान रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर समस्या का समाधान शीघ्र नहीं हुआ, तो जनता सक्रिय रूप से आवाज उठाने को मजबूर होगी।


