अमेरिका की नई ट्रेड जांच में भारत भी दायरे में, निर्यातकों पर बढ़ सकता है दबाव

अमेरिका की नई ट्रेड जांच में भारत भी दायरे में, निर्यातकों पर बढ़ सकता है दबाव

ब्यरो रिपोर्ट

डोनल्ड ट्रंप की अगुवाई वाली अमेरिकी सरकार ने चीन की कथित व्यापारिक रणनीतियों को निशाना बनाते हुए नया ट्रेड वार शुरू किया है। मार्च 2026 में Office of the United States Trade Representative (USTR) ने Trade Act of 1974 Section 301 के तहत दो बड़ी जांच शुरू की हैं। इन जांचों में कई देशों के साथ भारत का नाम भी शामिल है, जिससे भारतीय निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है।

पहली जांच 16 देशों की औद्योगिक नीतियों पर केंद्रित है, जिन पर अतिरिक्त उत्पादन क्षमता बनाकर अमेरिकी उद्योगों को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। दूसरी जांच लगभग 60 देशों पर केंद्रित है, जहां जबरन श्रम से बनी वस्तुओं को वैश्विक व्यापार में रोकने में असफलता की पड़ताल की जा रही है।

इस बीच Global Trade Research Initiative (GTRI) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन का तथाकथित “सोलर पैनल ट्रैप” अब भारतीय कंपनियों को भी प्रभावित कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार भारत सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में चीनी कच्चे माल और इंटरमीडिएट उत्पादों पर काफी निर्भर है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत का सोलर पैनल निर्यात काफी हद तक चीनी पॉलीसिलिकॉन और सोलर सेल्स पर निर्भर है। वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में चीनी केबल, कंपोनेंट और सब-असेंबली का इस्तेमाल होता है, जबकि टेक्सटाइल उद्योग में चीनी यार्न, फैब्रिक और कपास का उपयोग किया जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिकी अधिकारी सप्लाई चेन की सख्त ट्रेसेबिलिटी और मूल स्रोत का प्रमाण मांगते हैं, तो भारतीय कंपनियों को भारी दस्तावेजी प्रक्रिया और अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि भारत में जबरन श्रम पर पहले से ही रोक है और Bonded Labour System (Abolition) Act, 1976 के तहत इस पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद सप्लाई चेन में चीनी इनपुट्स की मौजूदगी भारत को अमेरिकी जांच के दायरे में ला सकती है।

GTRI ने सुझाव दिया है कि भारतीय कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को विविध बनाएं, चीन पर निर्भरता कम करें और वैकल्पिक स्रोतों जैसे वियतनाम, ताइवान या घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दें। विशेषज्ञों का मानना है कि मेक इन इंडिया और सोलर मिशन को मजबूत करना अब केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक आवश्यकता बन गया है, ताकि भारत वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति सुरक्षित रख सके।