

स्थान : रानीखेत
रिपोर्टर : संजय जोशी

रानीखेत के विकासखंड ताड़ीखेत में जंगलों में बढ़ती आग की घटनाओं को देखते हुए वनाग्नि रोकथाम पर एक महत्वपूर्ण चौपाल का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य क्षेत्र में वनाग्नि की रोकथाम को लेकर जनजागरूकता बढ़ाना और सामूहिक प्रयासों को मजबूत करना रहा।


इस चौपाल में क्षेत्र पंचायत सदस्यों, ग्राम प्रधानों तथा स्थानीय ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। सभी ने वनाग्नि की समस्या और उसके समाधान को लेकर विस्तार से चर्चा की तथा अपने-अपने सुझाव भी साझा किए।


कार्यक्रम में सहायक नोडल वनाग्नि गजेन्द्र कुमार पाठक ने वनाग्नि से होने वाले गंभीर नुकसान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जंगलों की आग से न केवल वन संपदा नष्ट होती है, बल्कि पर्यावरण, वन्यजीव और स्थानीय जीवन पर भी गहरा असर पड़ता है।


उन्होंने वनाग्नि के प्रमुख कारणों पर प्रकाश डालते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि कई बार मानवीय लापरवाही जैसे सूखी घास या कूड़ा जलाने से भी आग की घटनाएं तेजी से फैल जाती हैं।

गजेन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों में फैले आरक्षित, सिविल और पंचायती वनों की सुरक्षा केवल वन विभाग के भरोसे संभव नहीं है, इसके लिए जनसहयोग बेहद आवश्यक है।

उन्होंने अल्मोड़ा जिले के शीतलाखेत मॉडल का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां वन विभाग और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय से वनाग्नि प्रबंधन में सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि इसी तरह के मॉडल अन्य क्षेत्रों में भी अपनाए जाने चाहिए।


अंत में उन्होंने लोगों से अपील की कि वे खेतों या जंगलों के आसपास सूखी घास, पत्तियां या कूड़ा बिल्कुल न जलाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि छोटी सी लापरवाही भी बड़े स्तर पर वनाग्नि का कारण बन सकती है, जिससे भविष्य में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।


