
स्थान – काशीपुर
ब्यूरो रिपोर्ट
उत्तराखंड भाजपा में अनुशासन और एकजुटता की मर्यादाएं उस वक्त तार-तार होती नजर आईं, जब गदरपुर विधायक और पूर्व मंत्री अरविंद पांडेय को मिले अतिक्रमण नोटिस के बाद पार्टी के भीतर लंबे समय से दबा अंतर्विरोध खुलकर सामने आ गया।


इस नोटिस के बाद काशीपुर से लेकर गदरपुर तक भाजपा के भीतर सियासी तापमान अचानक बढ़ गया। पार्टी के नेता एक-दूसरे पर सार्वजनिक रूप से आरोप-प्रत्यारोप करते नजर आए, जिससे संगठन की अंदरूनी खेमेबाजी उजागर हो गई।


इस पूरे सियासी घमासान में काशीपुर के महापौर दीपक बाली ने मोर्चा संभालते हुए सीधे विधायक अरविंद पांडेय की भाजपा के प्रति निष्ठा और वफादारी पर ही सवाल खड़े कर दिए। उनके बयान को पार्टी के भीतर असंतोष की बड़ी चिंगारी माना जा रहा है।

महापौर बाली के बयान के बाद विवाद ने और भी नाटकीय मोड़ ले लिया, जब भाजपा के पूर्व विधायक प्रत्याशी गगन कांबोज खुलकर मैदान में उतर आए। कांबोज ने न केवल बाली के आरोपों का तीखा जवाब दिया, बल्कि उनके खिलाफ खुली चुनौती दे डाली।

गगन कांबोज ने अपने बयान में महापौर बाली के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यदि उनसे कोई गलती हुई है तो वह उसे ‘पाप’ मानते हैं, लेकिन दूसरों को भी अपनी सच्चाई जनता के सामने रखनी चाहिए।

कांबोज ने यहीं नहीं रुकते हुए महापौर दीपक बाली की पिछली चुनावी जीत की शुचिता पर भी सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने बाली को सार्वजनिक रूप से कसम खाकर अपनी जीत का सच बताने की चुनौती दी, जिससे सियासी हलकों में हलचल मच गई।

इस खुली जुबानी जंग से यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा के भीतर चल रही गुटबाजी अब किसी बंद कमरे की चर्चा नहीं रह गई है, बल्कि यह सार्वजनिक मंच पर खुले संघर्ष में तब्दील हो चुकी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निकाय चुनाव की दहलीज पर खड़ी भाजपा के लिए यह अंतर्कलह गंभीर संकट का संकेत हो सकता है। यदि समय रहते पार्टी नेतृत्व ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो इसका सीधा असर संगठन और चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।

