
स्थान : हरिद्वार
ब्यूरो रिपोर्ट
सिंचाई विभाग की भूमि पर बनी दुकानों को लेकर हलचल तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के डीआरओ मुनेश शर्मा ने मीडिया को बताया कि यह जमीन वर्ष 1952 में शासन द्वारा दुकानदारों को आवंटित की गई थी और तब से समय-समय पर उनका नवीनीकरण होता रहा है। वर्तमान में दुकानों का किराया वर्ष 2024 तक जमा है।


डीआरओ ने बताया कि लंबे समय के चलते कई दुकानों में अब मूल आवंटियों के स्थान पर उनके वारिस काबिज हैं। इसके अलावा विभाग को कुछ गंभीर शिकायतें भी मिली हैं, जिनमें अनाधिकृत कब्जे और तय सीमा से अधिक क्षेत्र में दुकानें फैलाने की बात सामने आई है।


इन शिकायतों की सत्यता जांचने के लिए उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की टीम मौके पर पहुंची और दुकानों का भौतिक सत्यापन शुरू किया गया। टीम ने दुकानों के क्षेत्रफल, मालिकाना हक और कब्जे की स्थिति की बारीकी से जांच की।


डीआरओ मुनेश शर्मा ने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमों के अनुसार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने साफ किया कि विभाग किसी भी प्रकार के अनियमित कब्जे को बर्दाश्त नहीं करेगा।

जांच के दौरान दुकानदारों से दस्तावेजों की भी मांग की गई और उनके पुराने रिकॉर्ड का मिलान किया गया। अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और कड़ाई से की जाएगी।


स्थानीय लोगों और दुकानदारों में इस जांच को लेकर कड़ी उत्सुकता और चर्चा देखने को मिल रही है। विभाग का मानना है कि यह कदम भूमि के उचित उपयोग और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

साथ ही डीआरओ ने चेतावनी दी कि जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार के विवादित निर्माण या अनाधिकृत विस्तार पर नजर रखी जाएगी और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

