
लोकेशन : चमोली (औली)
ब्यूरो रिपोर्ट
सूबे की खूबसूरत वादियों के बीच स्थित देश की प्रसिद्ध शीतकालीन पर्यटन स्थली औली की खोती पहचान को लौटाने के लिए आज से SAVE AULI मूवमेंट की औपचारिक शुरुआत कर दी गई। इस मुहिम में स्थानीय पर्यटन हितधारक, होटल कारोबारी, साहसिक पर्यटन गतिविधियों से जुड़े व्यवसायी और युवा एकजुट नजर आए। औली की दिशा और दशा सुधारने की मांग को लेकर पर्यटन कारोबारियों ने औली में ‘औली बचाओ रैली’ निकाली।


हिम क्रीड़ा स्थली औली में वर्षों पहले आधुनिक साहसिक गतिविधियों के लिए लगाए गए करोड़ों रुपये की लागत वाले यूरोपीय उपकरण, आयातित विदेशी इंफ्रास्ट्रक्चर और 15 वर्षों से बदहाल पड़े आर्टिफिशियल स्नो मेकिंग सिस्टम की जमीनी हकीकत को उजागर करने के उद्देश्य से यह आंदोलन शुरू किया गया है। कारोबारियों का आरोप है कि करोड़ों खर्च होने के बावजूद न तो कृत्रिम बर्फ बनाने की व्यवस्था चालू हो सकी और न ही करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई ओपन आइस स्केटिंग रिंक आज तक पूरी तरह संचालित हो पाई, जो फिलहाल वीरान पड़ी है।


रैली के दौरान औली चेयर लिफ्ट प्वाइंट के समीप प्रदर्शनकारियों ने पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और सांसद महेंद्र भट्ट का पुतला दहन किया। इस दौरान “GMVN बर्फ बनाओ”, “औली को बचाओ” जैसे नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक प्रदेश सरकार, पर्यटन विभाग और GMVN द्वारा आर्टिफिशियल स्नो मेकिंग सिस्टम और ओपन आइस स्केटिंग रिंक को पूरी तरह चालू नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। जरूरत पड़ने पर क्रमिक अनशन भी किया जाएगा।

पर्यटन हितधारकों का कहना है कि जो औली कभी देश का गौरव हुआ करता था, आज वही औली अपनी पहचान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। प्राकृतिक बर्फबारी के अभाव में औली की ढलानों पर बर्फ की जगह धूल उड़ती नजर आ रही है। कृत्रिम बर्फ बनाने वाली मशीनें जंग खा रही हैं और पूरा सिस्टम वर्षों से मौन पड़ा हुआ है।


कारोबारियों ने कहा कि अब यह सिर्फ पर्यटन का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी, आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल बन चुका है। औली पर निर्भर सैकड़ों परिवारों की आजीविका सीधे तौर पर पर्यटन से जुड़ी है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में पर्यटक औली से दूरी बना रहे हैं।

SAVE AULI मूवमेंट से जुड़े युवाओं और पर्यटन कारोबारियों ने स्पष्ट किया कि औली को सिर्फ प्रचार और तस्वीरों में ही खूबसूरत दिखाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर सुविधाओं को दुरुस्त करना होगा। इसी सोच के साथ सभी पर्यटन हितधारकों ने एकजुट होकर विंटर डेस्टिनेशन औली में ‘औली बचाओ मुहिम’ का आगाज किया है, ताकि औली फिर से देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सके।


