

स्थान – विकासनगर
ब्यूरो रिपोर्ट


जहां कभी हरियाली लहलहाती थी, आज वहां धूल और खनन का साम्राज्य है। विकासनगर के ढकरानी क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक क्रेशर प्लांट लगातार चलते हुए स्थानीय किसानों और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं।



स्थानीय किसानों का आरोप है कि क्रेशरों से निकलने वाला जहरीला पानी और बारीक पत्थर की धूल सीधे उनकी फसलों पर गिर रही है। कई खेत सफेद धूल की चादर ओढ़ चुके हैं और मेहनत से उगाई गई फसलें बर्बाद हो रही हैं। इसके अलावा जैव विविधता भी खतरे में है। आसन कंजर्वेशन रिज़र्व, जो एशिया में अपनी विदेशी पक्षियों की विविधता के लिए प्रसिद्ध है, उसपर भी इन क्रेशरों का दुष्प्रभाव पड़ रहा है।



जांच में यह भी सामने आया कि कई क्रेशर परिसरों में नियमों और पर्यावरणीय शर्तों को ताक पर रखकर खनन सामग्री का अवैध भंडारण किया जा रहा है। न तो उचित ढकाव किया गया है, न ड्रेनेज की व्यवस्था है और न ही प्रदूषण नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम हैं। बावजूद इसके, प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।



किसानों का कहना है कि जब वे शिकायत करने की कोशिश करते हैं, तो संबंधित अधिकारी फोन तक नहीं उठाते। इस पर सवाल उठता है कि क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या फिर खनन माफियाओं को खुला संरक्षण मिल रहा है।

कभी “फ्रूट ज़ोन” कहलाने वाला पछवादून अब “क्रेशर ज़ोन” में बदल चुका है। स्थानीय किसान चिंतित हैं कि उनकी जमीन और मेहनत सिर्फ मुनाफे के लिए बलि चढ़ाई जा रही है। वहीं, पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तुरंत नियंत्रण और सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो क्षेत्र में जैव विविधता और कृषि संकट गहरा सकता है।




