

स्थान – हरिद्वार

रिपोर्ट – धर्मराज


उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन का पहला दिन उत्साह और उमंग से भरा रहा। दो दिवसीय इस वैश्विक समागम में उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल व उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। विश्वविद्यालय परिसर हजारों विद्यार्थियों की उपस्थिति से खचाखच भरा रहा, जहाँ युवाओं ने संस्कृत भाषा और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति अपनी गहरी आस्था और रुचि प्रदर्शित की।



कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों और छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 128वें एपिसोड को सामूहिक रूप से सुना। इस अवसर ने सम्मेलन में उपस्थित युवा और शोधार्थियों के बीच ऊर्जा और उत्साह को और बढ़ाया।


कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि इस सम्मेलन में 11 देशों के प्रतिनिधि और भारतभर से 350 से अधिक डेलीगेट्स हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत न केवल भारत की प्राचीन धरोहर है, बल्कि विश्व के ज्ञान-विज्ञान का आधार भी है। राज्य सरकार संस्कृत को जन-जन तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग द्वारा प्रत्येक जिले में “संस्कृत ग्राम” स्थापित किए जा रहे हैं, जहाँ भाषा शिक्षण, संस्कृति संरक्षण और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रसार पर विशेष कार्य हो रहा है। साथ ही सरकार ने लक्ष्य रखा है कि एक लाख लोगों को संस्कृत बोलना सिखाया जाएगा, ताकि यह भाषा पुस्तकों तक सीमित न रहे, बल्कि रोजमर्रा की बातचीत में भी जीवंत रूप से उपयोग हो सके।



सम्मेलन में विभिन्न शोध-पत्र प्रस्तुतियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और विद्वानों के व्याख्यानों ने संस्कृत के वैश्विक महत्व को एक नई पहचान दी।




