

स्थान – पौड़ी गढ़वाल

रिपोर्ट – भगवान सिंह


भातखंडे हिंदुस्तानी संगीत महाविद्यालय, पौड़ी का वार्षिकोत्सव रविवार को प्रेक्षागृह पौड़ी में रंगारंग तरीके से आयोजित हुआ। कार्यक्रम कला, संगीत और वाद्य प्रस्तुतियों का अद्भुत संगम बनकर उभरा, जहां प्रशिक्षणरत बाल कलाकारों ने तबला, हारमोनियम, तानपूरा और गायन के माध्यम से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को जीवंत कर दिया।



कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि जिला सूचना अधिकारी योगेश पोखरियाल ने दीप प्रज्ज्वलन से की। इसके बाद मंच पर एक के बाद एक आकर्षक प्रस्तुतियाँ हुईं। नन्हें कलाकारों की सुर-ताल पर पकड़ और आत्मविश्वास ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। तबला वादन की प्रस्तुतियों ने धमार, तीनताल और किशोर तालों के विभिन्न रूपों को बेहतरीन अंदाज में पेश किया। हारमोनियम पर राग-आधारित धुनों ने वातावरण को शास्त्रीय रंगों से भर दिया, जबकि तानपूरा वादन ने भारतीय संगीत की पारंपरिक गरिमा को सुंदर रूप में सामने लाया।



मुख्य अतिथि योगेश पोखरियाल ने कहा कि संगीत मनुष्य के भीतर चेतना जगाने की क्षमता रखता है। उन्होंने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि महाविद्यालय के विद्यार्थी जिस लगन से सीख रहे हैं, वह उनके उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों के योगदान की भी प्रशंसा की और बच्चों को निरंतर साधना के लिए प्रेरित किया।

विशिष्ट अतिथि वार्ड सभासद संगीता रावत ने कहा कि बच्चों को मंच देना ही उनके भविष्य को दिशा देने जैसा है। उन्होंने विश्वास जताया कि पौड़ी की संगीत संस्कृति आगे भी समृद्ध और जीवंत रहेगी।


कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि द्वारा विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रधानाचार्य अनिरुद्ध सिंह बिष्ट, संगीत शिक्षक प्रमेन्द्र नेगी, इंद्रमोहन चमोली, नागेंद्र बिष्ट, अनिल नेगी, प्रेमचंद्र ध्यानी सहित मनोज रावत अंजुल, तपेश्वर आर्य, छात्र-छात्राएं और स्थानीय लोग मौजूद रहे।





