

स्थान… हल्द्वानी
रिपोर्ट…ऋषि कपूर

कुमाऊं के सबसे बड़े सुशीला तिवारी अस्पताल से एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल के ICU वार्ड के बाहर बंदरों का जमावड़ा देखा गया, जबकि अंदर मरीजों के बेड पर चींटियाँ रेंगती नजर आईं। यह स्थिति न सिर्फ भयावह है बल्कि अस्पताल की सुरक्षा और स्वच्छता पर बड़ा सवालिया निशान भी छोड़ती है।




बताया गया कि ICU के भीतर एक मरीज के बेड पर चींटियाँ पहुंच चुकी थीं, और मरीज के शरीर पर तक चींटियाँ चल रही थीं। वहीं ICU के बाहर बंदरों की मौजूदगी से तिमारदार अपने मरीजों के पास जाने से भी डर रहे हैं। अस्पताल में खुलेआम मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ हो रहा है और गंभीर मरीजों के इलाज पर सीधा असर पड़ रहा है।


स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन पूरी तरह लापरवाह है। न स्वच्छता पर ध्यान दिया जा रहा है और न ही सुरक्षा पर। प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं पहले ही सवालों के घेरे में थीं, लेकिन सुशीला तिवारी अस्पताल की यह स्थिति प्रशासन की तैयारियों और प्रबंधन की जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
अब बड़ा सवाल यही है कि—
मरीज जाएं तो जाएं कहां?
आखिर जिम्मेदारी किसकी है?





DM नैनीताल ने दिए कड़े निर्देश
इस पूरे मामले पर जिलाधिकारी नैनीताल ने कहा है कि अस्पताल प्रबंधन को मानकों के तहत रख-रखाव सुनिश्चित करने के सख्त आदेश जारी किए गए हैं। उन्होंने निर्देश दिया है कि अस्पताल परिसर में बंदरों की एंट्री रोकने के लिए त्वरित कदम उठाए जाएं और मरीजों के इलाज एवं स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
जनता का कहना है कि जब प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की हालत यह है, तो बाकी जगहों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन के आदेशों के बाद अस्पताल प्रबंधन स्थिति में कितनी सुधार लाता है।




