उत्तराखंड की रजत जयंती पर देहरादून में विशेष सत्र, राष्ट्रपति मुर्मू होंगी शामिल — गैरसैंण को लेकर छिड़ी सियासी बहस

उत्तराखंड की रजत जयंती पर देहरादून में विशेष सत्र, राष्ट्रपति मुर्मू होंगी शामिल — गैरसैंण को लेकर छिड़ी सियासी बहस

स्थान: देहरादून

उत्तराखंड राज्य के गठन की रजत जयंती के अवसर पर 3 और 4 नवंबर को देहरादून स्थित विधानसभा भवन में विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक अवसर पर देश की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शामिल होने की संभावना है। राज्य सरकार ने इस विशेष सत्र को “25 साल के विकास और उत्तराखंड के भविष्य की दिशा” पर केंद्रित बताया है।

हालांकि, इस विशेष सत्र को लेकर राजनीति भी गर्मा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने सवाल उठाया है कि यह सत्र देहरादून में नहीं, बल्कि गैरसैंण में होना चाहिए था, जो उत्तराखंड की जनता की “सपनों की राजधानी” रही है।

हरीश रावत ने कहा, “अगर महामहिम राष्ट्रपति गैरसैंण से विधानसभा को संबोधित करतीं, तो यह पूरे देश और दुनिया के सामने उत्तराखंड का गौरव बढ़ाने वाला क्षण होता।” उन्होंने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि गैरसैंण को राजधानी घोषित करने के वादे केवल राजनीतिक मंचों तक सीमित रह गए हैं।

वहीं, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने हरीश रावत के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि, “हरीश रावत ने केवल गैरसैंण का राग अलापा, लेकिन उसे राजधानी का नाम देने का साहस केवल भाजपा ने दिखाया।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में गैरसैंण के विकास के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए।

रजत जयंती समारोह के लिए राज्य सरकार ने व्यापक तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। विधानसभा भवन और देहरादून शहर को सजाया जा रहा है, जबकि सुरक्षा एजेंसियों ने राष्ट्रपति के प्रस्तावित आगमन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

राज्य के गठन के 25 वर्ष पूरे होने पर यह विशेष सत्र उत्तराखंड की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की दिशा तय करने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है — लेकिन गैरसैंण को लेकर छिड़ी राजनीतिक बहस ने इस उत्सव में नया रंग जरूर भर दिया है।