दीपावली पर गेरू-मिट्टी और चावल से बने विश्वार से जीवित हुई पुरानी परंपरा

दीपावली पर गेरू-मिट्टी और चावल से बने विश्वार से जीवित हुई पुरानी परंपरा

रिपोर्ट : ललित जोशी
स्थान : नैनीताल

आज के समय में जहां अधिकांश घरों में रेडीमेड ऐपण और स्टिकर आ गए हैं, और लोग समय की कमी व झंझट से बचने के लिए इन्हें ही इस्तेमाल कर लेते हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ महिलाएँ पुरानी परंपरा को जीवित रख रही हैं।

दीपावली के अवसर पर कई महिलाओं ने गेरू मिट्टी का लेप और चावल को पीसकर विश्वार तैयार किया और उसे मंदिर, देहली और अन्य स्थानों पर सुंदर ऐपण के रूप में सजाया। इस पारंपरिक कला को देखकर लोगों ने काफी सराहना की।

स्थानीय निवासी दीपा पांडे ने बताया कि किस तरह गेरू को लीपकर और चावल को पीसकर विश्वार बनाया जाता है और उसके जरिए मंदिर, देहली आदि पर लिखाई और सजावट की जाती है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे इस परंपरा को सीखें और आगे बढ़ाएँ, ताकि यह सांस्कृतिक धरोहर भविष्य में भी जीवित रहे।

यह परंपरा आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में लोकप्रिय है, जबकि शहरों में अधिकांश घरों में रेडीमेड ऐपण स्टिकर का उपयोग होता है। दीपावली के इस अवसर पर, यह पुरानी सांस्कृतिक विधा लोगों के बीच अपनी विशेष छवि बनाए हुए है।