

रिपोर्टर नाम-: आसिफ इक़बाल
लोकेशन-: रामनगर
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन द्वारा हाल ही में ईको-डेवलपमेंट कमेटियों (ईडीसी) को 90 लाख रुपये से अधिक की धनराशि वितरित की गई थी। इस राशि का उद्देश्य गांवों में वन्यजीवों से होने वाली क्षति की भरपाई और विकास कार्यों को बढ़ावा देना था।



हालांकि, अब इस वितरण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पांच गांवों के ईडीसी अध्यक्ष अपने-अपने चेक लौटाने पार्क प्रशासन पहुंचे और आरोप लगाया कि धनराशि के बंटवारे में भारी भेदभाव हुआ है। ईडीसी अध्यक्ष ओमप्रकाश गोड़ ने कहा कि उनके क्षेत्र में जंगली जानवरों से सबसे ज्यादा नुकसान होता है, बावजूद इसके उन्हें केवल 1.48 लाख रुपये का चेक दिया गया, जबकि कुछ नगर पालिका क्षेत्र की समितियों को लाखों रुपये दिए गए।



ओमप्रकाश ने उदाहरण देते हुए बताया कि चोरपानी क्षेत्र की ईडीसी को 11.06 लाख रुपये दिए गए, जबकि उनकी पूरी तरह जंगल से घिरी समिति को डेढ़ लाख रुपये ही मिले। उन्होंने इसे सीधा भेदभाव बताते हुए चेतावनी दी कि जब तक वास्तविक रूप से प्रभावित गांवों को उचित राशि नहीं दी जाती, वे चेक स्वीकार नहीं करेंगे।



इस मामले पर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पार्क वार्डन अमित ग्वासाकोटी ने कहा कि ईडीसी समितियों को पार्क प्रशासन द्वारा पर्यटन से मिले राजस्व का हिस्सा दिया जाता है, ताकि वन्यजीव क्षति को कम किया जा सके और विकास कार्यों में सहयोग मिल सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि शिकायतों पर विचार किया जाएगा और जैसे ही बजट उपलब्ध होगा, समस्याओं का समाधान किया जाएगा।




