

टॉप…. हल्द्वानी
रिपोर्ट…. ऋषि कपूर


हल्द्वानी की सड़कों पर इन दिनों 11 साल पुरानी एक दर्दनाक चीख फिर से गूंज रही है। यह चीख उस तीन वर्षीय मासूम की है, जिसके साथ दरिंदगी कर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। अब, इतने सालों बाद भी इंसाफ अधूरा है – बल्कि हालात और भी विचलित करने वाले हो गए हैं।




हाल ही में अदालत द्वारा इस मामले के आरोपी को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया गया, जिससे शहर में गुस्से की लहर दौड़ गई। लोग “पहाड़ी आर्मी” संगठन के बैनर तले सड़कों पर उतर आए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया।


प्रदर्शनकारियों ने इस फैसले को न्याय व्यवस्था पर बड़ा सवाल बताते हुए कहा कि इतने जघन्य अपराध के बाद भी अगर आरोपी बरी हो जाए, तो यह न केवल पीड़िता के परिवार के साथ अन्याय है, बल्कि समाज के लिए भी एक खतरनाक संकेत है।


भीड़ में उठती आवाजें साफ थीं –
“जब तक बेटी को इंसाफ नहीं मिलेगा, हमारी लड़ाई जारी रहेगी।”
“बेटी को इंसाफ दो, हत्यारे को सजा दो!”
लोगों ने सरकार और प्रशासन से अपील की कि इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाए और दोषी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि भविष्य में ऐसे मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए सुनवाई हो, ताकि पीड़ित परिवारों को वर्षों तक इंतजार न करना पड़े।


फिलहाल हल्द्वानी की सड़कों पर सिर्फ एक ही नारा गूंज रहा है –
“बेटी को इंसाफ दो”।
अब देखना यह होगा कि इस लंबी लड़ाई का अंत कब और कैसे होता है। क्या मासूम को आखिरकार इंसाफ मिलेगा? या फिर यह मामला भी अन्य हजारों अनसुलझे केसों की तरह धूल में दब जाएगा?


