

डिप्टी कुमाऊं कमिश्नर ने दिए जांच के आदेश, कार्रवाई या खानापूर्ति—सवाल बरकरार

बाजपुर,
रिपोर्ट – भूपेंद्र सिंह पन्नू

उत्तराखंड के सीमावर्ती कस्बे बाजपुर में मिलावटी और जहरीले दूध का धंधा धड़ल्ले से जारी है, और खाद्य सुरक्षा विभाग की लापरवाही के चलते राज्य की जनता, खासकर मासूम बच्चे, रोजाना जहर पीने को मजबूर हैं।
सूत्रों के अनुसार, हर दिन 7 से 8 गाड़ियां उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से मिलावटी दूध लेकर बाजपुर और हल्द्वानी क्षेत्र में पहुंच रही हैं, लेकिन खाद्य विभाग की टीम इन पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही।



मिलावटखोरी का खुलासा:
हमारे संवाददाता द्वारा की गई जांच में एक दूध विक्रेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस दूध में शैम्पू, ईजी (Easy), यूरिया और मिल्क पाउडर जैसी हानिकारक चीजों की मिलावट की जाती है।
यह काम स्वार क्षेत्र के धनपुर, शाहदरा, टोडीपुरा, लोधीपुरा आदि गांवों के लोगों द्वारा अंजाम दिया जा रहा है।



खाद्य विभाग पर गंभीर आरोप:
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी हर महीने मोटा पैसा लेकर आंखें मूंद लेते हैं, जिस कारण इन मिलावटखोरों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती।
सवाल यह है कि आखिर कब तक विभाग कुंभकर्ण की नींद सोता रहेगा और आम लोगों की सेहत से खिलवाड़ होता रहेगा?

प्रशासन की प्रतिक्रिया:
इस गंभीर मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए डिप्टी कुमाऊं कमिश्नर डॉ. राजेंद्र सिंह कथायत ने कहा कि,
“इस तरह की गतिविधियों पर टीम बनाकर सघन जांच की जाएगी और सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

खतरे में स्वास्थ्य:
- बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह मिलावटी दूध बेहद घातक साबित हो सकता है।
- गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ रहा है।
- राज्य की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है।
बाजपुर और हल्द्वानी क्षेत्र की जनता ने प्रशासन से फौरन कार्रवाई, दूध की नियमित जांच, और मिलावटखोरों पर कड़ी सजा की मांग की है।




