

श्रद्धा और विरासत का प्रतीक बना मंदिर पहुंचा जर्जर स्थिति में, BKTC अध्यक्ष को सौंपा गया ज्ञापन

चमोली, 11 सितंबर 2025
जहां एक ओर अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रहा है, वहीं उत्तराखंड के चमोली जनपद स्थित ज्योतिर्मठ प्रखंड के चांई गांव में विराजमान सीता माता के प्राचीन मंदिर की जर्जर होती स्थिति ने श्रद्धालुओं और स्थानीय ग्रामीणों को चिंता में डाल दिया है।



यह अद्वितीय मंदिर देश का एकमात्र स्थल है जहां माता सीता को पाषाण शिला रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि यहां माता सीता का पुनर्जन्म वेदवती रूप में हुआ था, और यही कारण है कि यह स्थान धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

मंदिर की बदहाल स्थिति, कभी भी गिर सकता है ढांचा
ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 1960 से पहले यह मंदिर लकड़ी और पठाल से बना हुआ था, जिसे बाद में स्थानीय जनता के सहयोग से पुनर्निर्मित किया गया था। लेकिन अब वर्तमान ढांचा जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है।

श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की भावनाओं को आहत करते हुए, मंदिर की स्थिति कभी भी पूरी तरह से धराशायी हो सकती है, जिससे एक गंभीर धार्मिक संकट उत्पन्न हो सकता है।


BKTC अध्यक्ष को सौंपा गया ज्ञापन
ग्राम प्रधान चांई और क्षेत्र पंचायत सदस्य की अगुवाई में ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के ज्योतिर्मठ स्थित कार्यालय पहुंचा, और अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि:

- मंदिर के पुनर्निर्माण हेतु तत्काल टेंडर जारी किया जाए
- BKTC अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए शीघ्र कार्य प्रारंभ करे
- यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण धरना प्रदर्शन और जन आंदोलन के लिए बाध्य होंगे
BKTC का आश्वासन
BKTC की ओर से ग्रामीणों को आश्वस्त किया गया है कि मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर शीघ्र ठोस कदम उठाए जाएंगे, और आवश्यक प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
तीर्थ यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण स्थल
यह मंदिर चारधाम यात्रा मार्ग पर स्थित होने के कारण, देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र भी है। पूरे वर्षभर यहां स्थानीय भक्तों और तीर्थयात्रियों का आगमन बना रहता है।


आपदा में भी माता की कृपा बनी रही
ग्रामीणों का मानना है कि सीता माता की कृपा से यह गांव कई बार भीषण आपदाओं से सुरक्षित रहा है।
- 2007, 2013 और 2018 की आपदाओं में, जब आसपास के इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए, तब चांई गांव सुरक्षित रहा।
- गांव के ऊपर भू-स्खलन जोन और बरसाती नालों के बावजूद, कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
एकमात्र स्थल जहां शिला रूप में होती है सीता माता की पूजा
यह स्थान इसलिए भी विशेष है क्योंकि देश में केवल यहीं माता सीता की पूजा शिला रूप में होती है।
यह मंदिर केवल धार्मिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर भी है, जिसे संजोना और संरक्षित करना पूरे समाज का दायित्व बनता है।



