हल्द्वानी में 147वीं ऐतिहासिक रामलीला का शुभारंभ, झंडा पूजन के साथ सजी आस्था की महफिल

हल्द्वानी में 147वीं ऐतिहासिक रामलीला का शुभारंभ, झंडा पूजन के साथ सजी आस्था की महफिल

हल्द्वानी, 6 सितंबर — कुमाऊं की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले हल्द्वानी में आज 147वीं ऐतिहासिक रामलीला का विधिवत शुभारंभ झंडा पूजन के साथ किया गया। परंपरागत उत्साह और श्रद्धा के साथ हुए इस आयोजन में नगर के गणमान्य नागरिक, श्रद्धालु और कलाकारों ने भारी संख्या में भाग लिया।

हर वर्ष की भांति इस बार भी रामलीला मैदान में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक धरोहर का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। झंडा पूजन के साथ जैसे ही इस ऐतिहासिक आयोजन की शुरुआत हुई, पूरे वातावरण में भक्ति, उल्लास और परंपरा की गूंज सुनाई दी।

147 वर्षों से जीवंत परंपरा

हल्द्वानी की यह रामलीला केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि शहर की 147 वर्षों पुरानी जीवंत विरासत है, जिसे पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानीय लोगों द्वारा संजोया और आगे बढ़ाया गया है। यहां की रामलीला की सबसे खास बात यह है कि इसका मंचन दिन और रात दोनों समय किया जाता है — एक परंपरा जो देशभर में बेहद दुर्लभ मानी जाती है।

स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुति, पौराणिक प्रसंगों की जीवंत झलक

रामलीला में सभी पात्रों की भूमिका स्थानीय कलाकार निभाते हैं, जो कई हफ्तों की कड़ी मेहनत, अभ्यास और समर्पण के साथ मंच पर भगवान श्रीराम की कथा को जीवंत करते हैं। मंचन के दौरान जब राम, लक्ष्मण, सीता, रावण जैसे पौराणिक पात्र मंच पर आते हैं, तो पूरा मैदान श्रद्धा और भक्ति रस से भर जाता है। दर्शक इन प्रसंगों से न केवल भावविभोर होते हैं, बल्कि उन्हें सामाजिक और धार्मिक शिक्षा भी मिलती है।

धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक

हल्द्वानी की रामलीला अब केवल धार्मिक आयोजन न रहकर सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकता और लोक परंपराओं का प्रतीक बन चुकी है। यहां हर वर्ग और धर्म के लोग श्रद्धा के साथ भाग लेते हैं, जिससे यह आयोजन समावेशी संस्कृति की मिसाल बन गया है।

आने वाले दिनों में होंगे प्रमुख प्रसंगों का मंचन

रामलीला कमेटी के अनुसार, आगामी दिनों में ताड़का वध, सीता स्वयंवर, राम वनवास, रावण वध जैसे प्रमुख प्रसंगों का भव्य मंचन किया जाएगा। इन प्रसंगों को देखने के लिए न सिर्फ शहरवासी, बल्कि आसपास के ग्रामीण और पर्यटक भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।


रामलीला आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं और दर्शकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में आयोजन में भाग लें और इस ऐतिहासिक धरोहर को आगे बढ़ाने में सहयोग करें।