

सतर्कता से टला बड़ा खतरा, बर्ड फ्लू पर नियंत्रण

देहरादून। उत्तराखंड में हाल ही में फैले बर्ड फ्लू के खतरे को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया। उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे इलाकों में बर्ड फ्लू के मामलों की सूचना मिलते ही पशुपालन विभाग तुरंत एक्टिव मोड में आ गया। विभाग की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के चलते यह बीमारी बड़े स्तर पर फैलने से पहले ही थम गई।




मिली जानकारी के अनुसार, कुमाऊं मंडल के किच्छा, सितारगंज और बागेश्वर में कुछ स्थानों पर बर्ड फ्लू के केस सामने आए थे। इस पर विभाग ने तुरंत प्रभावित क्षेत्रों से मुर्गी और पोल्ट्री प्रोडक्ट की सप्लाई रोक दी। इसके अलावा संदिग्ध इलाकों के आसपास 10 किलोमीटर के दायरे में विशेष निगरानी रखी गई और सेनेटाइजेशन की व्यवस्था की गई।


पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बताया कि विभाग पूरी तरह से सतर्क था। जैसे ही मामले सामने आए, तत्काल टीमों को मौके पर भेजा गया और जांच शुरू कर दी गई। प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सावधानियां बरती गईं, ताकि संक्रमण और आगे न फैल पाए। उन्होंने कहा कि विभाग का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की पोल्ट्री इंडस्ट्री और आम जनता दोनों को सुरक्षित रखना था।

मंत्री बहुगुणा ने यह भी बताया कि बॉर्डर क्षेत्रों से होने वाली सभी सप्लाई को अस्थायी रूप से रोक दिया गया। यह कदम इसलिए जरूरी था ताकि संक्रमित पोल्ट्री राज्य के अंदर प्रवेश न कर सके। उन्होंने कहा कि अगर समय पर यह रोकथाम नहीं होती तो हालात गंभीर हो सकते थे और हजारों किसानों व पोल्ट्री व्यवसायियों को भारी नुकसान उठाना पड़ता।


इस बीच, स्थानीय प्रशासन ने भी विभाग को हर संभव सहयोग दिया। प्रभावित क्षेत्रों में चौकसी बढ़ाई गई और ग्रामीणों को जागरूक किया गया कि वे संदिग्ध या बीमार पक्षियों की तुरंत सूचना दें।
गौरतलब है कि बर्ड फ्लू केवल पोल्ट्री तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि इसके फैलने से मानव स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडराने लगता है। यही कारण है कि सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए कोई ढिलाई नहीं बरती।


कुल मिलाकर, समय रहते उठाए गए कदम और विभाग की तत्परता ने उत्तराखंड को एक बड़े संकट से बचा लिया। अब जबकि हालात नियंत्रण में हैं, फिर भी सरकार ने सभी जिलों को सतर्क रहने और निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में भी इस तरह की चुनौती का तुरंत सामना किया जा सके।



