चम्पावत: 50 दिवसीय लौह शिल्प प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन

चम्पावत: 50 दिवसीय लौह शिल्प प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन

स्थान: लोहाघाट (चंपावत)
रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट

वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित 50 दिवसीय डिज़ाइन विकास प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन लोहाघाट स्थित ग्रोथ सेंटर में हुआ। यह प्रशिक्षण शिविर लौह शिल्प पर आधारित था, जिसमें जिले के 30 से अधिक महिला और पुरुष शिल्पियों ने प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम का समापन वन विकास परिषद के उपाध्यक्ष एवं दर्जा मंत्री श्याम नारायण पाण्डेय ने किया। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण न केवल स्थानीय कारीगरों को स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाने का अवसर देगा, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकल फॉर वोकल के विजन को भी साकार करेगा।

श्री पाण्डेय ने शिल्पियों द्वारा बनाए गए आकर्षक उत्पादों की सराहना की और कहा कि पारंपरिक शिल्प को आधुनिक स्वरूप देने का प्रयास सराहनीय है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस तरह के प्रशिक्षण से ग्रामीण अंचलों में स्वरोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।

डिज़ाइन व बाजार से जोड़ने की पहल

कार्यक्रम में हस्तशिल्प मंत्रालय के इम्प्लांट डिज़ाइनर सौरव मिश्रा ने बताया कि इस कार्यशाला में शिल्पियों को डिज़ाइनिंग, डिमांड और ट्रेंड की जानकारी दी जा रही है, ताकि वे बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप अपने उत्पाद तैयार कर सकें। साथ ही प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक प्रतिभागी को ₹300 प्रतिदिन का सुविधा शुल्क भी दिया जा रहा है।

आधुनिक उत्पादों का प्रशिक्षण

प्रशिक्षक अमित कुमार ने बताया कि 50 दिवसीय प्रशिक्षण में शिल्पियों को लौह शिल्प से फ्लावर पॉट, पेन स्टैंड, टेबल स्टैंड, झालर और डोर पॉट जैसे आधुनिक साज-सामान बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। इसका उद्देश्य शिल्पियों को परंपरा और आधुनिकता के मेल से आत्मनिर्भर बनाना है।

महिलाओं में उत्साह

प्रशिक्षण में शामिल महिला प्रतिभागियों ने कहा कि इस कार्यशाला से उन्हें घर-गृहस्थी में उपयोगी सजावटी वस्तुएं बनाने की तकनीक सीखने को मिली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह प्रशिक्षण उनके लिए भविष्य में आर्थिक आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।