मसूरी में नाले की दिशा बदलने की कोशिश, प्राकृतिक संसाधनों से छेड़छाड़ पर हंगामा

मसूरी में नाले की दिशा बदलने की कोशिश, प्राकृतिक संसाधनों से छेड़छाड़ पर हंगामा

रिपोर्टर : सुनील सोनकर
स्थान : मसूरी (उत्तराखंड)

पहाड़ों की रानी कही जाने वाली मसूरी में भूमि माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे अब सीधे प्राकृतिक संसाधनों से छेड़छाड़ करने से भी नहीं चूक रहे हैं। हाल ही में स्प्रिंग रोड क्षेत्र में सामने आए एक मामले ने पूरे शहर को सकते में डाल दिया है, जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय निवासी नितिन गुप्ता ने बताया कि कुछ लोगों द्वारा उनके घर के पास से गुजरने वाले प्राकृतिक नाले की दिशा को जेसीबी मशीन के जरिए बदलने का प्रयास किया जा रहा था। यह काम देर रात भारी बारिश के तुरंत बाद किया गया, और पाइपलाइन के माध्यम से पानी को सड़क के नीचे से दूसरी दिशा में मोड़ने की कोशिश की गई।

नितिन गुप्ता का कहना है कि हालिया बारिश में उनके घर के पास की सड़क और नाला पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ऐसे में यदि नाले की दिशा बदली जाती है, तो उनका मकान गंभीर खतरे में आ सकता है।
उन्होंने बताया कि जब स्थानीय मीडिया ने वन विभाग और नगर पालिका परिषद को मामले की जानकारी दी, तब जाकर संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचे और तत्काल कार्य को रुकवाया गया।

वन विभाग ने लिया संज्ञान
मसूरी के डीएफओ अमित कंवर ने बताया कि उन्होंने रेंजर को मौके पर भेजकर जांच करवाई है और विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मसूरी के प्राकृतिक संसाधनों से छेड़छाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि कोई नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मसूरी की सीमा पार कर चुकी है पर्यावरणीय क्षमता
विशेषज्ञों के अनुसार, मसूरी की “कैरीइंग कैपेसिटी” यानी कि वह जनसंख्या, निर्माण और पर्यावरणीय दबाव जिसे यह क्षेत्र सहन कर सकता है — वह पहले ही कई गुना पार हो चुकी है। 2022 में प्रकाशित एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, मसूरी अधिकतम 15,000 पर्यटक और 25,000 स्थायी निवासियों को समाहित करने योग्य है। लेकिन मौजूदा समय में यह आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो चुका है।

लगातार हो रहे अनियंत्रित निर्माण, अवैध प्लॉटिंग, जल स्रोतों पर अतिक्रमण और नालों की दिशा बदलने जैसी घटनाएं मसूरी को एक पर्यटन स्थल से धीरे-धीरे आपदा क्षेत्र में बदल रही हैं। हर बारिश के बाद भूस्खलन की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं, और कई जल स्रोत या तो सूख चुके हैं या गंभीर संकट में हैं।

स्थानीयों की मांग: सख्त कार्रवाई हो
नितिन गुप्ता और अन्य स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं:

  • अवैध निर्माणों पर तत्काल स्थगन आदेश (Stay Order) लगाया जाए
  • पर्यावरणीय नुकसान की स्वतंत्र जांच कराई जाए
  • दोषियों — चाहे वे निजी व्यक्ति हों या सरकारी कर्मचारी — पर आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसे कार्यों पर समय रहते लगाम नहीं लगाई गई, तो मसूरी की पहचान खतरे में पड़ सकती है। पर्यावरण संरक्षण और नियोजित विकास के बिना पहाड़ों की यह रानी भविष्य में विनाश का केंद्र बन सकती है।