

रिपोर्ट : संजय कुंवर
स्थान : बद्रीनाथ धाम



भू-बैकुंठ नगरी श्री बद्रीनाथ धाम में इन दिनों प्राधिकरण और मास्टर प्लान की नीतियों के खिलाफ गहरा असंतोष देखने को मिल रहा है। श्री बद्रीश संयुक्त संघर्ष समिति के नेतृत्व में स्थानीय लोगों, होटल कारोबारियों, व्यापारियों और पंडा समाज ने व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।


14 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले 14 दिनों से चल रहे इस जन आंदोलन ने अब नया मोड़ ले लिया है। सोमवार से आंदोलनकारियों ने क्रमिक अनशन शुरू किया, जिसके पहले विरोध स्वरूप मुंडन कराया गया। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह मुंडन प्रदेश सरकार और प्राधिकरण की जनविरोधी नीतियों को समर्पित है।



बाजार दोपहर 2 बजे तक रहा बंद, सड़कों पर जनसैलाब

संघर्ष समिति के आह्वान पर सोमवार को बद्रीनाथ धाम का पूरा बाजार दोपहर 2 बजे तक बंद रहा। सुबह 11 बजे से सड़कों पर सैकड़ों लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिन्होंने हाथों में विरोध की तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। पंडा समाज सहित समस्त व्यापारिक संगठनों ने भी आंदोलन को पूर्ण समर्थन दिया है।


‘सांसद और सरकार जवाब दो’ के नारों से गूंज उठा धाम

साकेत तिराहे पर हुई सभा में गढ़वाल सांसद और प्रदेश सरकार के खिलाफ तीखे नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि वे सरकार की थोपी गई योजनाएं और मास्टर प्लान नहीं स्वीकारेंगे। जन भावना के विरुद्ध बनाई जा रही नीतियां स्थानीयों के अस्तित्व, आजीविका और परंपरा के लिए खतरा हैं।

तीन दिन का क्रमिक अनशन, फिर आगे की रणनीति

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने जानकारी दी कि अब आंदोलन क्रमिक अनशन की ओर बढ़ गया है, जो तीन दिन तक चलेगा। इसके बाद आंदोलन की नई रणनीति पर काम किया जाएगा।
आंदोलन की शुरुआत हनुमान चालीसा पाठ के साथ की गई, जो पूरे जन आंदोलन को धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ता है।

संघर्ष समिति की प्रमुख मांगें (संक्षेप में):
- प्राधिकरण की सीमाएं समाप्त की जाएं
- मास्टर प्लान में स्थानीयों की सहमति अनिवार्य हो
- पारंपरिक व्यवसायों की सुरक्षा
- तीर्थ क्षेत्र में बिना अनुमति निर्माणों पर रोक का विरोध
- स्थानीय पंडा समाज के अधिकारों की रक्षा
- रोजगार और पुनर्वास की गारंटी
- पर्यावरणीय संतुलन के नाम पर हो रहे अतिक्रमणों पर पुनर्विचार
(बाकी मांगें संघर्ष समिति के ज्ञापन में संलग्न हैं)


निष्कर्ष:
बद्रीनाथ धाम में उठ रही आवाजें अब सिर्फ विरोध नहीं, एक व्यापक जनभावना का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। जिस तीव्रता और व्यापक समर्थन के साथ आंदोलन आगे बढ़ रहा है, उससे साफ है कि सरकार को अब संवाद के रास्ते पर आना ही होगा। वरना यह विरोध राज्यव्यापी जनांदोलन का रूप भी ले सकता है।



