

स्थान : लोहाघाट (चंपावत)
रिपोर्ट : लक्ष्मण बिष्ट


राज्य सरकार द्वारा छात्राओं को बेहतर आवासीय सुविधा देने के उद्देश्य से लोहाघाट राजकीय महाविद्यालय परिसर में करीब 4 करोड़ 23 लाख रुपए की लागत से महिला छात्रावास का निर्माण तो करा दिया गया है, लेकिन निर्माण पूर्ण होने के कई महीने बाद भी यह छात्रावास शुरू नहीं हो पाया है। परिणामस्वरूप, दूर-दराज से आने वाली छात्राएं आज भी रहने की समस्या से जूझ रही हैं।



छात्रावास में 50 छात्राओं के रहने की क्षमता है, जिसका निर्माण कार्य उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड द्वारा कराया गया है। यह छात्रावास अप्रैल में महाविद्यालय प्रशासन को हैंडओवर कर दिया गया था, लेकिन अब तक इसका संचालन शुरू नहीं हो सका है।


निर्माण के बाद उपेक्षा, परिसर में झाड़ियाँ और जंगली घास

स्थानीय लोगों और छात्राओं का कहना है कि करोड़ों की लागत से बना यह भवन अब सफेद हाथी बनता जा रहा है। परिसर में झाड़ियाँ, घास और जंगली पौधों का कब्जा हो गया है, जिससे परिसर की हालत जर्जर हो रही है। यह स्थिति न केवल सार्वजनिक धन की बर्बादी को दर्शाती है, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता को भी उजागर करती है।


प्राचार्य का बयान

लोहाघाट महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. संगीता गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि,
“छात्रावास में अभी कुछ छोटे कार्य बाकी हैं, जिसे निर्माण एजेंसी को बताया गया है। अप्रैल में भवन हमें सौंपा गया था, लेकिन उच्च अधिकारियों ने कहा है कि उनकी टीम पहले निरीक्षण करेगी, उसके बाद ही संचालन की अनुमति दी जाएगी। चिट्ठी भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी तक टीम नहीं आई है।”

उन्होंने यह भी बताया कि वाणिज्य संकाय का नव निर्मित भवन भी अभी शुरू नहीं हो पाया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है।
जनता की मांग


क्षेत्रवासियों और छात्र-छात्राओं ने मांग की है कि प्रशासन जल्द से जल्द निरीक्षण कराकर छात्रावास और वाणिज्य संकाय भवन को संचालित करे। वे कहते हैं कि जब सरकार ने इतनी बड़ी राशि खर्च कर भवन बनवाया है तो उसका लाभ छात्रों को तुरंत मिलना चाहिए, न कि वह वीरान पड़ा रहे।



