पंचायती चुनावों में धांधली का आरोप, खटीमा विधायक भुवन कापड़ी ने सत्ता पक्ष पर बोला हमला

पंचायती चुनावों में धांधली का आरोप, खटीमा विधायक भुवन कापड़ी ने सत्ता पक्ष पर बोला हमला

स्थान : खटीमा ऊधम सिंह नगर
रिपोर्ट : अशोक सरकार

उत्तराखंड में हाल ही में संपन्न हुए पंचायती चुनावों को लेकर राजनीतिक संग्राम तेज हो गया है। खटीमा के कांग्रेस विधायक भुवन चंद्र कापड़ी ने रविवार को सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेशभर में सत्ता पक्ष ने प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत से चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया है। उन्होंने इसे लोकतंत्र की खुली हत्या करार दिया।

सत्ता पर चुनाव को प्रभावित करने का आरोप

विधायक कापड़ी ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हुए पंचायती चुनावों में सत्ता पक्ष ने न सिर्फ लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार किया, बल्कि परिणामों में भी धांधली की गई।


उन्होंने आरोप लगाया कि नानकमत्ता और सितारगंज में जीते हुए प्रत्याशियों को हारता हुआ दिखाया गया और तीसरे नंबर पर रहे प्रत्याशियों को विजयी घोषित कर दिया गया।

नैनीताल से रुद्रप्रयाग तक धांधली के आरोप

कापड़ी ने कहा कि नैनीताल में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के दौरान खुलेआम शासन-प्रशासन की मिलीभगत से पुलिस की मौजूदगी में जिला पंचायत सदस्यों का अपहरण किया गया और उनके साथ मारपीट तक की गई।
उन्होंने बताया कि बेतालघाट में फायरिंग हुई, बाजपुर में गुंडागर्दी कर चुनाव को प्रभावित किया गया, वहीं द्वाराहाट में पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में पथराव हुआ।


इसी तरह, रुद्रप्रयाग में एक वोट को निरस्त कर कांग्रेस प्रत्याशी को जानबूझकर पराजित घोषित कर दिया गया।

कानून-व्यवस्था पर सवाल

कापड़ी ने कहा कि चुनावों के दौरान राज्य सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह निष्पक्ष और शांतिपूर्ण प्रक्रिया सुनिश्चित करे, लेकिन यहां उल्टा सत्ता पक्ष ने ही गुंडागर्दी और अराजकता को बढ़ावा दिया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता ने लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने के लिए वोट दिया था, लेकिन सत्ता पक्ष और प्रशासन की मिलीभगत से लोकतंत्र की आत्मा को चोट पहुंचाई गई है।

कांग्रेस का आह्वान

विधायक कापड़ी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस “लोकतंत्र की हत्या” और सत्ता द्वारा किए जा रहे दमन की घोर निंदा करती है। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे इस अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर आवाज़ बुलंद करें।
उन्होंने कहा, “यह सिर्फ चुनाव की बात नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को बचाने की लड़ाई है। अगर आज हम चुप रहे तो आने वाले समय में आम जनता की आवाज़ को पूरी तरह से दबा दिया जाएगा।”