

स्थान : नैनीताल
रिपोर्ट : ललित जोशी


सरोवर नगरी नैनीताल से दूर बेतालघाट क्षेत्र में पंचायत प्रमुख और उप प्रमुख के चुनाव के दौरान हुई फायरिंग की घटना ने पूरे जनपद में हड़कंप मचा दिया है। यह मामला अब केवल स्थानीय विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का रूप ले चुका है।



निर्वाचन आयोग का संज्ञान
14 अगस्त को हुए चुनाव के दौरान गहमागहमी और कहासुनी के बीच अचानक फायरिंग की घटना सामने आई। इस घटना ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने तुरंत संज्ञान लिया और कड़ा रुख अपनाया। आयोग की जांच रिपोर्ट के आधार पर भवाली के पुलिस क्षेत्राधिकारी प्रमोद शाह के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेज दी गई है। वहीं, बेतालघाट थानाध्यक्ष अनीश अहमद को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं।


विपक्ष के आरोप और बढ़ा दबाव

घटना के बाद से ही विपक्षी दलों ने प्रशासन पर पक्षपात और लापरवाही का आरोप लगाया था। उनका कहना है कि यदि पुलिस और प्रशासन ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान पूरी सतर्कता बरती होती, तो इस तरह की घटना घटित ही न होती। विपक्षी नेताओं ने यह भी मांग की थी कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।


राजनीतिक तापमान चढ़ा
बेतालघाट की इस घटना ने स्थानीय राजनीति का तापमान और भी बढ़ा दिया है। पंचायत चुनाव को लेकर पहले से ही गांव-गांव में माहौल गरमाया हुआ था, वहीं इस फायरिंग कांड ने लोगों की नाराज़गी को और हवा दे दी है। आम ग्रामीण अब प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठाने लगे हैं।

निर्वाचन आयोग का संदेश

राज्य निर्वाचन आयोग ने अपने रुख से यह साफ कर दिया है कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की हिंसा, गड़बड़ी या धांधली को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग के सूत्रों का कहना है कि यदि आगे भी इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, तो और भी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने पंचायत चुनावों में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि चुनाव जैसे संवेदनशील मौके पर पुलिस बल की मौजूदगी में फायरिंग हो सकती है, तो आम जनता अपनी सुरक्षा की गारंटी किससे मांगे।



