बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान पर गरमाया विवाद, 13वें दिन आंदोलन तेज

बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान पर गरमाया विवाद, 13वें दिन आंदोलन तेज

लोकेशन : बद्रीनाथ धाम

भू बैकुंठ नगरी श्री बद्रीनाथ धाम में मास्टर प्लान और प्राधिकरण की नीतियों को लेकर बीते 13 दिनों से चल रहा स्थानीय लोगों, होटल कारोबारियों, पंडा समाज और व्यापारियों का संयुक्त जन आंदोलन अब और अधिक तेज़ हो गया है। इस आंदोलन ने अब धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के स्वरूप को भी गहरा रंग देना शुरू कर दिया है।

धरोहरों पर संकट की चिंता

मास्टर प्लान के अंतर्गत निर्माण कार्यों के चलते धाम की कई पौराणिक धरोहरें संकट में हैं। ब्रह्मकपाल तीर्थ, ब्रह्मशिला और तप्तकुंड क्षेत्र में अलकनंदा नदी के तेज बहाव से लगातार कटाव हो रहा है। इससे इन धार्मिक स्थलों के अस्तित्व पर मंडराता खतरा स्थानीय लोगों को बेहद चिंतित कर रहा है। श्रद्धालु मानते हैं कि यह स्थल न केवल सनातन आस्था के प्रतीक हैं, बल्कि बद्रीनाथ धाम की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान भी इन्हीं से जुड़ी हुई है।

संत आत्मानंद महाराज का भावुक संदेश

बद्रीपुरी के संत आत्मानंद महाराज ने इस स्थिति पर गहरी पीड़ा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि “मैं सनातन संस्कृति पर इस प्रकार की आंच आते नहीं देख सकता। यदि धाम की धरोहर और सनातन आस्था पर चोट होती रही, तो मैं दुखी मन से प्राण त्यागने तक को तैयार हूँ।” संत का यह बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है और इससे आंदोलन को और बल मिला है।

आंदोलनकारियों की नई रणनीति

बद्रीश संयुक्त संघर्ष समिति के तत्वावधान में चल रहे इस आंदोलन ने अब नई रणनीति बनाई है। समिति की कोर कमेटी ने निर्णय लिया है कि सोमवार से बद्रीनाथ धाम में बाज़ार बंद रखा जाएगा और साथ ही क्रमिक अनशन की भी शुरुआत की जाएगी। यह आंदोलन अब केवल विरोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चरणबद्ध तरीके से दबाव बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

जोरदार रैली और नारेबाजी

रविवार सुबह आंदोलनकारियों ने धाम के मुख्य बाजार से लेकर साकेत तिराहे तक बड़ी रैली निकाली। इस दौरान हाथों में तख्तियां लिए स्थानीय लोग, व्यापारी, पंडा समाज और होटल कारोबारी शासन-प्रशासन के खिलाफ ज़ोरदार नारेबाजी करते दिखे। पूरा वातावरण “धरोहर बचाओ–धाम बचाओ” जैसे नारों से गूंज उठा।

10 सूत्रीय मांगें

आंदोलनकारियों ने शासन-प्रशासन के समक्ष अपनी 10 सूत्रीय मांगें रखी हैं, जिनमें—

  • पौराणिक धरोहरों को मास्टर प्लान से बाहर रखने,
  • धाम के पारंपरिक स्वरूप को सुरक्षित बनाए रखने,
  • होटल कारोबारियों और स्थानीय व्यापारियों के हितों की रक्षा करने,
  • और मास्टर प्लान की समीक्षा कर इसे जनभावनाओं के अनुरूप बनाने की मांग प्रमुख है।

बढ़ती गंभीरता

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार विकास योजनाओं के नाम पर धाम की मौलिक पहचान और सनातन आस्था के साथ खिलवाड़ कर रही है। यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं हुआ, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।