डिबेट मंचों पर बिगड़ती भाषा की मर्यादा: महिला सांसदों पर अभद्र टिप्पणियों के खिलाफ समाजवादी पार्टी का तीखा रुख

डिबेट मंचों पर बिगड़ती भाषा की मर्यादा: महिला सांसदों पर अभद्र टिप्पणियों के खिलाफ समाजवादी पार्टी का तीखा रुख

रिपोर्टर : अज़हर मलिक
लोकेशन : काशीपुर

देश में टीवी डिबेट अब विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम नहीं, बल्कि बदतमीज़ी और अभद्रता का मंच बनते जा रहे हैं। हाल ही में दो अलग-अलग घटनाओं ने इस मुद्दे को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है, जहां महिला सांसदों पर की गई अशोभनीय टिप्पणियों ने जनभावनाओं को झकझोर दिया।

मौलाना की टिप्पणी और डिबेट में हंगामा

एक टीवी डिबेट के दौरान मौलाना साजिद रशीदी ने समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। उन्होंने मस्जिद में बैठी उनकी एक तस्वीर को आधार बनाकर अशालीन भाषा का प्रयोग किया,

जिसके बाद डिबेट शो में ही मौलाना की सरेआम पिटाई कर दी गई। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मंच पर चढ़कर हमला किया और कहा कि “जो महिला का सम्मान नहीं करता, उसे मंच पर बैठने का हक नहीं है।”

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे देशभर में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

करणी सेना नेता का बेहूदा बयान

इसी क्रम में एक और मामला सामने आया है, जहां करणी सेना के जिला उपाध्यक्ष योगेंद्र राणा ने सपा सांसद इकरा हसन के खिलाफ भद्दी और आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्होंने सोशल मीडिया पर खुलेआम लिखा कि वे इकरा हसन से निकाह करना चाहते हैं और इसके लिए उनके पास “पैसा, संपत्ति, बीवी की इजाज़त और नमाज़ की जगह” सब कुछ है। यह बयान सार्वजनिक होते ही बवाल मच गया और योगेंद्र राणा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

समाजवादी पार्टी का कड़ा रुख

इन घटनाओं पर समाजवादी पार्टी के उत्तराखंड प्रभारी नदीम अख्तर का सख्त और दो टूक बयान सामने आया है। उन्होंने कहा:

“अब समय आ गया है कि जो भी महिला सांसदों के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करेगा, उसे जवाब मंच पर नहीं, मैदान में मिलेगा। समाजवादी पार्टी तुष्टिकरण की नहीं, सबको साथ लेकर विकास की राजनीति करती है।”

उन्होंने बीजेपी पर भी पलटवार करते हुए कहा कि “महिलाओं का अपमान कर सुर्खियां बटोरने वाले ही असल में तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे हैं।”

“मौलाना” या टीवी कलाकार?

नदीम अख्तर ने डिबेट शो में अक्सर नजर आने वाले कथित धर्मगुरुओं पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा:

“ये कौन मौलाना हैं जिन्हें हर मंच पर बिठा दिया जाता है? इन्हें न बहस की भाषा आती है, न तमीज़। कभी एंकर से लड़ते हैं, कभी प्रवक्ताओं से। इससे न सिर्फ समाज, बल्कि धर्म भी शर्मसार होता है।”