

मसूरी

रिपोर्टर सुनील सोनकर

उत्तराखंड पर्यटन विभाग द्वारा मसूरी आने वाले पर्यटकों के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य किए जाने के फैसले ने स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों और पर्यटकों के बीच चिंता और भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।



जहां एक ओर पर्यटन विभाग इस कदम को भीड़ नियंत्रण, पार्किंग प्रबंधन और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं दूसरी ओर व्यापारी वर्ग और राजनीतिक प्रतिनिधि इसे व्यवसाय और पर्यटन पर प्रतिकूल असर डालने वाला फैसला मान रहे हैं।

पर्यटन विभाग की दलील:
पर्यटन विभाग के अनुसार, यह रजिस्ट्रेशन व्यवस्था मसूरी की केयरिंग कैपेसिटी को समझने और जरूरत अनुसार संसाधनों के प्रबंधन में मदद करेगी। विभाग का मानना है कि यह प्रणाली पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सैलानियों की सुविधा में भी सहायक होगी।


भ्रम की स्थिति:
हालांकि, नियम लागू होने के बाद सोशल मीडिया पर भ्रम फैल चुका है कि बिना रजिस्ट्रेशन मसूरी में प्रवेश नहीं मिलेगा। अधिकांश पर्यटक रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया से अनजान हैं। इससे पर्यटन स्थलों पर पहुंचने वाले सैलानी भ्रमित और असहज महसूस कर रहे हैं।
व्यापारियों की नाराजगी:


मसूरी होटल एसोसिएशन के महामंत्री अजय भार्गव का कहना है कि मसूरी आने वाले 60-70% पर्यटक आखिरी समय पर यात्रा का प्लान करते हैं। यदि उन्हें पहले से रजिस्ट्रेशन करना पड़ा, तो वे शिमला या नैनीताल जैसे विकल्प चुन सकते हैं। यह स्थानीय व्यापार के लिए सीधा नुकसान होगा।



ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव जगजीत कुकरेजा ने चेतावनी दी कि अगर यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो व्यापारी वर्ग विरोध प्रदर्शन करेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि रजिस्ट्रेशन को वैकल्पिक बनाया जाए और चेक-इन के समय इसकी सुविधा दी जाए। साथ ही, सरकार को पहले इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू कर आकलन करना चाहिए।

राजनीतिक विरोध:
मसूरी महिला कांग्रेस अध्यक्ष जसबीर कौर ने इस नीति को अव्यावहारिक करार देते हुए कहा कि न तो हर पर्यटक तकनीकी रूप से सक्षम है, और न ही हर जगह इंटरनेट की सुविधा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार यह निर्णय वापस नहीं लेती, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर विरोध करेगी।
समर्थन भी मिला:
भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश सदस्य आर्यन देव उनियाल ने सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि यह समय की जरूरत है, लेकिन प्रशासन को इसे लागू करने में पारदर्शिता बरतनी चाहिए, ताकि भ्रम की स्थिति न बने।

निष्कर्ष:
सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्टीकरण या विस्तृत गाइडलाइन सामने नहीं आई है, जिससे स्थानीय व्यवसायी और पर्यटक अनिश्चितता की स्थिति में हैं। व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि इस योजना को तत्काल प्रभाव से रोका जाए या व्यवहारिक रूप से संशोधित किया जाए।


