

अल्मोड़ा

रिपोर्ट हरीश भण्डारी

अल्मोड़ा जिले में पंचायत चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं और इस बार का जनादेश बेहद दिलचस्प रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस ने जहां 15-15 सीटें जीतकर बराबरी हासिल की है, वहीं 15 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज कर सियासी समीकरणों को उलझा दिया है।



कुल 45 सीटों में से किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पाया है, जिससे अब जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर जोड़-तोड़ और रणनीतिक बैठकों का दौर शुरू हो गया है।



सत्तारूढ़ बीजेपी और मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस दोनों ही निर्दलीय सदस्यों को अपने पक्ष में करने की कोशिशों में जुट गई हैं।


निर्दलीयों की बनी ‘किंगमेकर’ भूमिका
चुनाव परिणामों ने यह साफ कर दिया है कि इस बार सरकार बनाने से लेकर अध्यक्ष पद तक, निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका सबसे अहम रहेगी। दोनों प्रमुख दलों की निगाहें अब इन 15 विजयी निर्दलीय सदस्यों पर टिकी हैं, जो इस चुनावी तस्वीर में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।


विकास के वादों पर काम का संकल्प
वहीं, विजयी प्रत्याशियों ने जीत के बाद जनता का आभार जताते हुए कहा है कि वे अब जनसेवा और विकास के वादों को प्राथमिकता देंगे। कई नव-निर्वाचित सदस्यों ने क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों पर तेजी से काम करने की बात कही है।


अब देखना दिलचस्प होगा कि अध्यक्ष पद की यह सियासी जंग किस करवट बैठती है — बीजेपी की सत्ता बरकरार रहती है

या कांग्रेस वापसी करती है, या फिर निर्दलीय उम्मीदवार कोई नया समीकरण रचते हैं।


