पिरूल से बनी राखियों से बदल रही गांव की तस्वीर: रुद्रप्रयाग की महिलाएं बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

पिरूल से बनी राखियों से बदल रही गांव की तस्वीर: रुद्रप्रयाग की महिलाएं बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

रिपोर्ट : नीरज कंडारी
स्थान : रुद्रप्रयाग

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड की ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल गढ़ रही हैं। जनपद रुद्रप्रयाग के ग्राम जवाड़ी की महिलाएं प्राकृतिक संसाधनों का रचनात्मक उपयोग करते हुए न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रही हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी सशक्त हो रही हैं।

यहाँ के हिमाद्री स्वयं सहायता समूह एवं जय रुद्रनाथ CLF से जुड़ी महिलाओं ने चीड़ की पत्तियों (पिरूल) से सुंदर राखियाँ तैयार कर बाज़ार में एक खास पहचान बनाई है। यह अभिनव पहल ‘लोकल फॉर वोकल’ की भावना को भी मजबूती दे रही है।

जंगल से जुड़ी आजीविका

पिरूल, जो आमतौर पर जंगलों में आग लगने का कारण बनता है, अब महिलाओं के लिए रोज़गार का साधन बन गया है। महिलाओं ने बताया कि उन्होंने पूर्व में पिरूल से हस्तशिल्प निर्माण का प्रशिक्षण प्राप्त किया था। उसी का उपयोग अब राखी बनाने में किया जा रहा है।

चीड़ की पत्तियों को साफ़ कर, रंगों से सजाया जाता है और फिर रचनात्मक ढंग से पर्यावरण मित्र राखियों में बदला जाता है। साथ ही पैकिंग का कार्य भी महिलाएं स्वयं कर रही हैं।

बाज़ार में मिल रही सराहना

इन राखियों की बिक्री स्थानीय बाज़ारों में हो रही है और उन्हें लोगों से बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार महिलाओं को अधिक ऑर्डर मिल रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी में भी बढ़ोतरी हुई है।

सरकारी सहयोग और आत्मबल की साझी कहानी

यह प्रयास महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण जागरूकता और ग्रामीण उद्यमिता को एक साथ जोड़ता है। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में चल रही योजनाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण अंचलों में स्वरोजगार की अलख जगा रहे हैं।

प्रेरणा बन रहीं ग्रामीण महिलाएं

यह पहल केवल एक व्यवसायिक प्रयास नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के हुनर, आत्मबल और नवाचार की प्रेरणादायक कहानी है, जो प्रकृति से प्रेरणा लेकर आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सशक्त क़दम बढ़ा रही हैं।