

हल्द्वानी

राज्य में जारी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब सिर्फ स्थानीय निकाय तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि इन्हें 2027 के विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। इसी कारण सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी पूरी ताकत पंचायत चुनाव में झोंक दी है।



जहां भाजपा ने कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री, विधायक और प्रदेश स्तरीय नेताओं को मैदान में उतार दिया है, वहीं कांग्रेस ने भी मोर्चा संभाल लिया है। पहाड़ी आर्मी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भाजपा सरकार पर कड़ा हमला बोला है।

डबल इंजन विकास पर सवाल

हरीश रावत ने कहा कि भाजपा सरकार पिछले 9 वर्षों से डबल इंजन विकास की बात कर रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की मूलभूत समस्याएं अब भी जस की तस हैं।

“अगर वास्तव में विकास हुआ होता, तो आज पंचायत चुनाव में नेताओं को विरोध का सामना नहीं करना पड़ता,” उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी बताया कि भरतपुर, नैनवालपुर और बचीनगर जैसे क्षेत्रों में सरकारी प्रतिनिधियों को ग्रामीणों ने कड़े विरोध का सामना कराया है, जिससे यह साफ है कि जनता अब जागरूक और जवाबदेही चाहती है।
धनबल और बाहुबल का चुनाव
पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि
“भाजपा धनबल और बाहुबल के सहारे पंचायत चुनाव कब्जाने की कोशिश कर रही है।”
उन्होंने कहा कि प्रत्याशियों को हर तरह के प्रलोभन देकर वोटों को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण मतदाता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
युवाओं को नशे की ओर धकेलने का आरोप

हरीश रावत ने यह भी कहा कि

“पंचायत चुनाव की आड़ में कुछ क्षेत्रों में युवाओं को नशे में धकेला जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।”
उन्होंने प्रशासन से इस मुद्दे पर तत्काल सख्त कदम उठाने की मांग की।

रामणी आनसिंह में बढ़ा गुस्सा
हल्द्वानी से सटे रामणी आनसिंह जिला पंचायत सीट पर भी भाजपा नेताओं पर डर का माहौल बनाने का आरोप लगा है। रावत ने कहा कि जनता अब इन हथकंडों से नाराज है और इसका जवाब बैलट बॉक्स में देगी।
निष्कर्ष:

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब सिर्फ स्थानीय स्तर की राजनीति नहीं रह गई, बल्कि यह स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए जनता का मूड बनना शुरू हो गया है।
भाजपा जहां डबल इंजन विकास मॉडल के साथ चुनाव मैदान में उतरी है, वहीं कांग्रेस उसे जनता के असंतोष और मुद्दों के आधार पर घेरने की कोशिश कर रही है।
अगले चरणों के मतदान और नतीजे तय करेंगे कि यह सेमीफाइनल किसके लिए राहत और किसके लिए खतरे की घंटी है।


